शिवमोग्गा। कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मौजूदगी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद हो गया। पश्चिमी घाट और मलनाड क्षेत्र पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के प्रभाव को लेकर शनिवार को आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में गीत के केवल दो अंतरे गाए जाने पर शिवमोग्गा से भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने मंच से आपत्ति जताई। उनके हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

यह कार्यक्रम तीर्थहल्ली में स्थानीय किसानों, आम लोगों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री शिवकुमार कार्यक्रम में मुख्य रूप से लोगों की चिंताओं और सुझावों को सुनने पहुंचे थे। उनके साथ वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी, जिला प्रभारी मंत्री मधु बंगारप्पा, सांसद बी.वाई. राघवेंद्र और स्थानीय विधायक भी मौजूद थे।

कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य गीत के बाद ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। जब इसके केवल दो अंतरे गाए गए तो शिवमोग्गा के भाजपा विधायक एस.एन. चन्नबसप्पा ने मंच पर ही इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

चन्नबसप्पा ने माइक संभालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन केवल दो अंतरे गाए जाने से लोगों की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन कराया जाए। उनके इस हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने विरोध जताया और कुछ देर के लिए मंच के आसपास माहौल तनावपूर्ण हो गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, चन्नबसप्पा के मंच से बोलने के दौरान कुछ लोगों ने नारे लगाए और उन्हें अपनी सीट पर लौटने के लिए कहा। मंच पर मौजूद कुछ लोगों ने भी उन्हें शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद चन्नबसप्पा ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से संक्षिप्त बातचीत की। थोड़ी देर बाद वह कार्यक्रम से बाहर चले गए।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच भी नारेबाजी हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष एच.सी. योगेश ने मंच से मुख्यमंत्री शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए। इससे कार्यक्रम में कुछ समय के लिए भ्रम और शोर की स्थिति बनी। हालांकि बाद में कार्यक्रम कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से जुड़े मूल मुद्दे पर आगे बढ़ा।

पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा

‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन को लेकर चन्नबसप्पा पहले भी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 16 सितंबर को शिवमोग्गा में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस से जुड़े एक सरकारी कार्यक्रम में भी उन्होंने केवल दो अंतरे गाए जाने पर नाराजगी जताई थी और कार्यक्रम से बाहर चले गए थे। इसके कुछ दिनों बाद तीर्थहल्ली में उन्होंने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक बार फिर यही मुद्दा उठाया।

शिवकुमार ने क्या कहा?

विवाद के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे गाने की परंपरा जारी रखेगी। उन्होंने चन्नबसप्पा के कार्यक्रम में इस मुद्दे को उठाने को लेकर कहा कि वह इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते। शिवकुमार ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया ही इस मुद्दे पर उनका जवाब है।

मुख्यमंत्री की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई जब पूरा कार्यक्रम कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के कारण मलनाड क्षेत्र के किसानों और स्थानीय निवासियों की चिंताओं पर केंद्रित था। सरकार का उद्देश्य इस रिपोर्ट से जुड़े संभावित प्रभावों पर स्थानीय लोगों की राय लेना था।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर हो रही थी चर्चा

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और उनके संरक्षण से जुड़ी है। कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में इस रिपोर्ट को लेकर किसानों और स्थानीय निवासियों की चिंताएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। राज्य सरकार भी इसके क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय लोगों के हितों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बात कर रही है।

तीर्थहल्ली के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों और स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत की। सरकार की ओर से कहा गया कि किसी भी फैसले से पहले जमीनी स्थिति और लोगों की चिंताओं को समझना जरूरी है। इसी बैठक में वन विभाग से किसानों को नए नोटिस जारी नहीं करने और नए अतिक्रमण को अनुमति नहीं देने से जुड़े निर्देशों की बात भी सामने आई।

कार्यक्रम में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के तहत चिन्हित क्षेत्रों का भौतिक सर्वे कराने की मांग भी उठी। स्थानीय प्रतिनिधियों ने कहा कि जमीनी स्थिति को समझने के लिए केवल नक्शों और सैटेलाइट डेटा पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक क्षेत्र का सर्वे किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर संबंधित जनप्रतिनिधियों से चर्चा करने की बात कही।

इस तरह तीर्थहल्ली का कार्यक्रम एक ओर मलनाड क्षेत्र के किसानों और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर चर्चा के लिए आयोजित हुआ था, लेकिन ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन को लेकर भाजपा विधायक की आपत्ति ने कुछ समय के लिए राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का रूप ले लिया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं और कार्यक्रम में थोड़ी देर के लिए हंगामे की स्थिति बनी।

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