कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड के 35 साल से ऑडिट नहीं होने पर डिप्टी CM की नाराजगी

Update: 2026-08-02 05:24 GMT

बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड के कामकाज को लेकर अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी संस्था की वित्तीय पारदर्शिता के लिए नियमित ऑडिट बेहद जरूरी है, लेकिन कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड का पिछले 35 वर्षों से ऑडिट नहीं कराया गया, जो गंभीर लापरवाही है।

शनिवार को आयोजित प्रोग्रेस रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए डॉ. परमेश्वर ने अधिकारियों से इस मामले में जवाब मांगा और व्यवस्था में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक ऑडिट नहीं होना वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही के लिहाज से उचित नहीं है।

बैठक में बोर्ड के विकास कार्यों, लंबित योजनाओं और भविष्य की परियोजनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए बेहतर योजना और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी।

डॉ. परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि किसी भी विकास परियोजना की शुरुआत में तैयार किए गए अनुमानित खर्च में बाद में बदलाव की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए ठोस कारण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि संशोधित लागत का प्रस्ताव बिना उचित वजह और दस्तावेजों के स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि यदि किसी परियोजना की लागत बढ़ती है तो पहले कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही सरकार स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उनका कहना था कि सरकारी धन का उपयोग पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।

बैठक के दौरान कुडलसंगम और आसपास के क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और आवश्यक बजट की जानकारी उपमुख्यमंत्री के सामने रखी।

चिक्कासंगम में प्रस्तावित वेलफेयर हॉल और वेद पाठशाला के निर्माण समेत कई विकास कार्यों के लिए करीब 24.98 करोड़ रुपये की ग्रांट की मांग की गई है। इस प्रस्ताव पर भी बैठक में चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्ताव की समीक्षा के बाद जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, लेकिन सभी परियोजनाओं में नियमों और वित्तीय अनुशासन का पालन होना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड राज्य के महत्वपूर्ण विकास निकायों में से एक है, जो क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और विभिन्न परियोजनाओं के विकास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बोर्ड के वित्तीय प्रबंधन और परियोजनाओं की निगरानी को लेकर सरकार की विशेष नजर है।

डॉ. परमेश्वर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि जनता को भी सुविधाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

बैठक में अधिकारियों ने बोर्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जानकारी दी और चल रहे कार्यों की स्थिति से अवगत कराया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा, ताकि परियोजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी हो सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं के लिए जारी होने वाले धन का सही उपयोग सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुडलसंगम क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, इसलिए यहां विकास कार्यों को लेकर सरकार लगातार ध्यान दे रही है। क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

हालांकि, बोर्ड के लंबे समय से ऑडिट नहीं होने का मुद्दा सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। अब अधिकारियों को वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित करने और ऑडिट प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाने होंगे।

उपमुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उम्मीद है कि कुडलसंगम डेवलपमेंट बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

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