बेंगलुरु : मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने शुक्रवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कार्यक्रम की प्रगति से जुड़े आंकड़े जारी किए। कार्यालय के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के तहत पूरे राज्य में मतदाताओं के लिए 43.81 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए गए हैं। इनमें से 24.97 लाख नोटिस संबंधित मतदाताओं को सफलतापूर्वक जारी किए जा चुके हैं, जबकि 18.84 लाख से अधिक नोटिस अभी लंबित हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 10 सितंबर तक राज्य की मतदाता सूची में कुल 4,46,58,413 मतदाता दर्ज हैं। इनमें लगभग 2.21 करोड़ पुरुष और 2.24 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में थर्ड जेंडर श्रेणी के 2,874 मतदाता भी दर्ज हैं। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक बताई गई है।

कार्यालय के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के तहत मुख्य रूप से उन मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिन्हें “नो मैपिंग” और “विसंगति” वाली श्रेणियों में रखा गया है। नो मैपिंग का अर्थ ऐसे मामलों से हो सकता है, जिनमें मतदाता के वर्तमान विवरण का उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड से आवश्यक मिलान नहीं हो पाया है। वहीं विसंगति की श्रेणी में नाम, उम्र, पता या अन्य विवरणों में अंतर वाले मामले शामिल हो सकते हैं।

हालांकि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने का अर्थ उसका नाम स्वतः मतदाता सूची से हट जाना नहीं है। नोटिस के जरिए संबंधित व्यक्ति को अपने विवरण की पुष्टि करने, आवश्यक दस्तावेज अथवा स्पष्टीकरण देने का अवसर मिलता है। उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन अधिकारी किसी मामले पर निर्णय ले सकते हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक पूरे राज्य में कुल 43,81,760 नोटिस तैयार किए गए थे। इनमें से 24,97,075 नोटिस मतदाताओं को सफलतापूर्वक जारी किए जा चुके हैं। यह कुल तैयार नोटिसों का 56.99 प्रतिशत है। वहीं 18,84,685 नोटिस अब भी जारी किए जाने बाकी हैं। इस तरह करीब 43 प्रतिशत नोटिस लंबित हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लंबित नोटिसों को निर्धारित अवधि में संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाना निर्वाचन तंत्र के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों और बूथ स्तर के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मैदानी कर्मचारियों को मतदाताओं के पते का सत्यापन करने और व्यक्तिगत रूप से नोटिस पहुंचाने का काम करना पड़ सकता है।

एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जाता है। इस प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाती है, जिनका निधन हो चुका है, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं या जिनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है। इसके साथ ही पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़ने और विवरण संबंधी गलतियों को ठीक करने की प्रक्रिया भी की जाती है।

मतदाता सूची में नाम, पता, उम्र और अन्य जानकारी सही होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल के लिए जरूरी है। किसी मतदाता का विवरण गलत होने पर मतदान केंद्र में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। एसआईआर के माध्यम से निर्वाचन विभाग ऐसी त्रुटियों को चुनाव से पहले दूर करने का प्रयास कर रहा है।

जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हुए हैं, उनसे निर्धारित समय के भीतर जवाब देने की अपेक्षा की जाती है। उन्हें नोटिस में मांगी गई जानकारी के अनुसार अपने विवरण की पुष्टि करनी होगी। अगर किसी दस्तावेज की जरूरत बताई गई है तो उसे संबंधित अधिकारी के सामने प्रस्तुत करना होगा। मतदाता ऑनलाइन अथवा निर्धारित ऑफलाइन माध्यम से भी अपने विवरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

निर्वाचन अधिकारियों के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है कि किसी पात्र व्यक्ति का नाम केवल तकनीकी त्रुटि या रिकॉर्ड में अंतर के कारण सूची से न हटे। विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों, प्रवासी श्रमिकों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों और डिजिटल सुविधाओं से दूर मतदाताओं तक जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता है।

विपक्षी दल और नागरिक संगठन सामान्यतः ऐसी पुनरीक्षण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग करते हैं। उनका कहना रहता है कि नोटिस जारी करने से लेकर जवाब स्वीकार करने और अंतिम निर्णय लेने तक प्रत्येक चरण स्पष्ट होना चाहिए। मतदाता को सुनवाई और रिकॉर्ड में सुधार का पर्याप्त अवसर देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग 2.24 करोड़ है, जबकि पुरुष मतदाता करीब 2.21 करोड़ हैं। महिला मतदाताओं की अधिक संख्या आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। महिला सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाएं चुनावी विमर्श में प्रमुख स्थान प्राप्त कर सकती हैं।

थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 2,874 दर्ज की गई है। निर्वाचन प्रक्रिया में इस समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए नामांकन, पहचान और मतदान केंद्रों पर सुविधाओं से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण हैं। चुनाव अधिकारियों का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में उचित पहचान के साथ शामिल करना होना चाहिए।

एसआईआर में शामिल “नो मैपिंग” मामलों पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। कई बार पुराने रिकॉर्ड की जानकारी स्पष्ट न होने, पते में बदलाव या दस्तावेजों में अलग-अलग वर्तनी के कारण मिलान नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में मतदाता से प्रत्यक्ष संपर्क और स्थानीय सत्यापन के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

इसी प्रकार विसंगतियों वाले मामलों में मामूली त्रुटियों और गंभीर विरोधाभासों के बीच अंतर करना जरूरी होगा। किसी व्यक्ति के नाम की वर्तनी में मामूली अंतर, उम्र में रिकॉर्ड संबंधी गलती अथवा मकान संख्या बदलने जैसी परिस्थितियों का समाधान सुधार प्रक्रिया से किया जा सकता है। अधिकारियों को प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच करनी होगी।

निर्वाचन कार्यालय के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता शेष 18,84,685 नोटिसों को संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाना है। इसके बाद प्राप्त जवाबों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची तैयार करने से पहले दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें और निर्धारित समय में जवाब दें। जिन लोगों को आशंका है कि उनका नाम या विवरण मतदाता सूची में गलत है, वे आधिकारिक माध्यम से उसकी जांच करा सकते हैं। समय रहते सुधार कराने से मतदान के दौरान आने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

राज्य में चार करोड़ 46 लाख से अधिक मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण एक व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है। अब तक 56.99 प्रतिशत नोटिसों का वितरण पूरा हो चुका है। शेष नोटिसों के वितरण और मामलों के निस्तारण की गति से ही तय होगा कि एसआईआर कार्यक्रम निर्धारित समय में कितना प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

Tags: