HDMC विभाजन पर विरोध, धारवाड़ को नुकसान की आशंका

Update: 2026-07-25 05:41 GMT

हुबली-धारवाड़ : हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम के नेताओं ने हुबली-धारवाड़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (HDMC) को दो हिस्सों में बांटने की मांग का विरोध किया है। नेताओं का कहना है कि अगर नगर निगम का विभाजन किया गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान धारवाड़ शहर को उठाना पड़ेगा। साथ ही हुबली-धारवाड़ की संयुक्त पहचान और विकास परियोजनाओं के लिए मिलने वाले अवसरों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

फोरम के नेताओं ने कहा कि हुबली-धारवाड़ वर्तमान में राज्य का एक प्रमुख शहरी क्षेत्र है और बेंगलुरु के बाद बड़े विकास प्रोजेक्ट और सरकारी अनुदान प्राप्त करने की क्षमता रखता है। उनका दावा है कि दोनों शहरों के एक साथ रहने से क्षेत्र को अधिक महत्व मिलता है और बड़े स्तर की योजनाओं के लिए प्राथमिकता मिलती है।

नेताओं ने कहा कि अलग-अलग नगर निगम बनाने की मांग किसी ठोस विकास योजना पर आधारित नहीं है, बल्कि भावनात्मक मुद्दों और सीमित सोच से प्रेरित है। उनका तर्क है कि दोनों शहरों की संयुक्त प्रशासनिक व्यवस्था ने अब तक क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम के प्रतिनिधियों ने कहा कि दोनों शहरों को अलग करने से उनकी संयुक्त ताकत कमजोर हो जाएगी। वर्तमान में हुबली-धारवाड़ को एक बड़े शहरी क्षेत्र के रूप में देखा जाता है, जिससे राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में क्षेत्र को फायदा मिलता है।

फोरम के नेताओं के अनुसार, विभाजन के बाद धारवाड़ शहर की शहरी रैंकिंग और विकास क्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अलग नगर निगम बनने पर धारवाड़ बड़े शहरों की सूची में पीछे चला जाएगा और विकास परियोजनाओं के लिए प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कम हो सकती है।

उन्होंने कहा कि हुबली और धारवाड़ दोनों शहरों की अपनी अलग पहचान और महत्व है, लेकिन दोनों का साझा विकास मॉडल ही क्षेत्र को मजबूत बनाता है। एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था के कारण बुनियादी ढांचे, परिवहन, शहरी विकास और अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर योजनाएं लागू करना आसान होता है।

फोरम के नेताओं ने यह भी कहा कि हुबली-धारवाड़ को राज्य में बेंगलुरु के बाद एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में नगर निगम का विभाजन विकास की गति को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े शहरों को अक्सर अधिक निवेश, बेहतर बुनियादी ढांचे और विशेष परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता मिलती है। यदि हुबली और धारवाड़ अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां बन जाते हैं तो दोनों की संयुक्त ताकत कम हो सकती है।

वहीं, अलग नगर निगम की मांग करने वाले लोगों का तर्क है कि दोनों शहरों की स्थानीय समस्याएं अलग हैं और बेहतर प्रशासन के लिए अलग-अलग निकाय होना जरूरी है। उनका मानना है कि अलग निगम बनने से स्थानीय जरूरतों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा और प्रशासनिक कामकाज तेज हो सकता है।

हालांकि, हुबली-धारवाड़ मेट्रोपॉलिटन सिटी फोरम के नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर शहरों को बांटना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि सरकार को किसी भी निर्णय से पहले इसके आर्थिक और विकास संबंधी प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करना चाहिए।

फोरम ने कहा कि हुबली-धारवाड़ की पहचान एक संयुक्त महानगरीय क्षेत्र के रूप में बनी है और इसे बनाए रखना क्षेत्र के हित में है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह शहर के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए फैसला ले।

नेताओं के अनुसार, किसी भी बड़े प्रशासनिक बदलाव का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि किसी फैसले से विकास की संभावनाएं कम होती हैं तो उस पर दोबारा विचार किया जाना जरूरी है।

फिलहाल HDMC के विभाजन को लेकर बहस जारी है। एक ओर जहां अलग निगम की मांग को लेकर आवाज उठ रही है, वहीं दूसरी ओर कई संगठन और नेता इसे क्षेत्र के विकास के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं। आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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