बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों (State Public Service Commissions) की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य लोक सेवा आयोगों को फिर से व्यवस्थित किया जाए और उनकी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाएं।
सांसद ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था की ओर इशारा करते हैं, जिसमें लंबे समय से समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोगों को इस संकट का एक बड़ा कारण बताया।
छात्रों के आंदोलन को बताया व्यवस्था की बीमारी का संकेत
लहर सिंह सिरोया ने कहा कि देश के कई हिस्सों में छात्रों का सड़कों पर उतरना मौजूदा व्यवस्था में भरोसे की कमी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जब युवाओं को लगता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है या परिणामों में देरी हो रही है, तो उनका असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
सांसद ने कहा कि राज्य लोक सेवा आयोगों को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था अपनानी होगी।
केंद्र और राज्यों के बीच नीति बनाने की मांग
BJP सांसद ने कहा कि राज्य लोक सेवा आयोगों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि आयोगों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कोई ठोस नीति या कानूनी समाधान तैयार किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि केवल अस्थायी कदम उठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लंबे समय के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप पर उठाए सवाल
लहर सिंह सिरोया ने राज्य लोक सेवा आयोगों में राजनीतिक दखल को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आयोगों में राजनीतिक हस्तक्षेप एक खुली सच्चाई बन चुका है और कई जगहों पर इसका असर परीक्षा प्रक्रिया और नियुक्तियों पर दिखाई देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अक्सर जब सरकारों पर दबाव बढ़ता है तो सुधार समितियों का गठन किया जाता है, लेकिन समय बीतने के बाद उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
सुधार समितियों की रिपोर्ट पर अमल की जरूरत
सांसद ने कहा कि कई राज्यों में आयोगों की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए समितियां बनाई गईं, लेकिन उनकी रिपोर्ट पर प्रभावी तरीके से अमल नहीं हो सका।
उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी सुधार समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुछ समय तक चर्चा हुई, लेकिन बाद में स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के चक्र को तोड़ने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।
आयोगों की छवि सुधारने पर जोर
लहर सिंह सिरोया ने कहा कि लोक सेवा आयोगों की जिम्मेदारी युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे संस्थानों में किसी भी तरह का अविश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने कहा कि आयोगों को अपनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए और परीक्षाओं से जुड़े हर चरण को अधिक विश्वसनीय बनाना चाहिए।
जातिगत राजनीति के आरोप
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राज्य लोक सेवा आयोग जातिगत राजनीति का केंद्र बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में योग्यता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर पक्षपात की भावना पैदा होती है तो इससे युवाओं का भरोसा कमजोर होता है।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा
राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाएं लाखों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में जाने का प्रमुख माध्यम होती हैं।
परीक्षा में देरी, विवाद, पेपर लीक या चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने से उम्मीदवारों में निराशा बढ़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी सुधार, स्वतंत्र निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था जरूरी है।