पुलिस विभाग में प्रमोशन का दौर तेज 27,534 अधिकारियों और कर्मचारियों को मिली पदोन्नति
बेंगलुरु: पुलिस विभाग में लंबे समय से चल रही प्रमोशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पुलिस हेडक्वार्टर ने सब-इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोट करने के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटी (DPC) की समीक्षा शुरू कर दी है। विभाग की ओर से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग पदों पर पदोन्नति दी गई है।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, विभाग के 58 कैडर में कुल 27,534 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रमोट किया गया है। इनमें फील्ड स्तर पर तैनात बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल हैं, जिन्हें उनकी सेवा अवधि, प्रदर्शन और पात्रता के आधार पर पदोन्नति दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, 12,928 कॉन्स्टेबलों को हेड कॉन्स्टेबल के पद पर प्रमोट किया गया है। इसके अलावा 5,171 हेड कॉन्स्टेबलों को असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के पद पर पदोन्नति मिली है। पुलिस विभाग में यह प्रमोशन प्रक्रिया कर्मचारियों के करियर विकास और पदों की रिक्तियों को भरने के उद्देश्य से की जा रही है।
इसी क्रम में इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन के लिए पुलिस प्रशासन ने करीब 2,100 एक्टिंग इंस्पेक्टरों और सब-इंस्पेक्टरों के सेवा रिकॉर्ड की जांच की। डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटी ने अधिकारियों के प्रदर्शन, सेवा रिकॉर्ड और अन्य जरूरी मानकों की समीक्षा की।
जांच प्रक्रिया के बाद 1,029 अधिकारियों को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोट किया गया है। अब पुलिस मुख्यालय की ओर से शेष योग्य अधिकारियों के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है ताकि पात्र उम्मीदवारों को पदोन्नति का अवसर मिल सके।
सूत्रों के अनुसार, प्रमोशन प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती कोविड-19 महामारी के दौरान तैयार की गई वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) से जुड़ी रही है। बताया जा रहा है कि कोविड की दूसरी लहर वाले वर्ष में कई सब-इंस्पेक्टरों की ACR समय पर तैयार नहीं हो पाई थी।
ACR पुलिस विभाग में प्रमोशन के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसमें अधिकारी के कामकाज, अनुशासन, प्रदर्शन और विभागीय रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। प्रमोशन के दौरान अधिकारियों की योग्यता तय करने में ACR की अहम भूमिका होती है।
सूत्रों के मुताबिक, कई अधिकारियों की ACR पूरी नहीं होने के कारण उनका प्रमोशन अलग-अलग कारणों से प्रभावित हुआ। इसके अलावा कुछ अधिकारियों की विभागीय जांच के नतीजे भी उनकी ACR में शामिल नहीं किए गए थे।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में ऐसे दंड या कार्रवाई भी ACR में दर्ज नहीं थे, जिनसे संबंधित अधिकारियों को बाद में राहत मिल चुकी थी। इन तकनीकी और रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं के कारण प्रमोशन प्रक्रिया में देरी हुई।
पुलिस प्रशासन अब इन मामलों की समीक्षा कर रहा है ताकि किसी योग्य अधिकारी को केवल रिकॉर्ड संबंधी कमियों के कारण पदोन्नति से वंचित न रहना पड़े। DPC के जरिए सभी रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है।
पुलिस विभाग में समय पर प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और विभागीय कार्यक्षमता में भी सुधार होता है। अधिकारियों का कहना है कि प्रमोशन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा रहा है।
पुलिस बल में पदोन्नति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती बल्कि इससे विभागीय जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। इंस्पेक्टर जैसे पदों पर आने वाले अधिकारियों को कानून व्यवस्था, जांच और प्रशासनिक कार्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस विभाग में नियमित प्रमोशन से निचले स्तर के कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इससे जवानों और अधिकारियों में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा भी बढ़ती है।
फिलहाल पुलिस हेडक्वार्टर की ओर से सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन की समीक्षा जारी है। आने वाले समय में और अधिकारियों को पदोन्नति मिलने की संभावना है।