बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार जमीन के रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सत्यापन योग्य बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य ने ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, टेनेंसी एंड क्रॉप्स’ यानी RTC को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया है। नए प्रारूप में जमीन से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से एकीकृत करने के साथ आधार से जोड़ने और संबंधित भूखंड की लोकेशन के आधार पर सत्यापित करने योग्य बनाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य अचल संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी जानकारी को ज्यादा स्पष्ट करना और जमीन संबंधी विवादों तथा रिकॉर्ड में होने वाली गड़बड़ियों को कम करना है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) राजेंद्र कुमार कटारिया के मुताबिक अगले कुछ महीनों के दौरान कम से कम 20 लाख नए डिजाइन वाले RTC जारी करने की तैयारी है। नई व्यवस्था में मौजूदा भूमि रिकॉर्ड के साथ डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, जिससे जमीन और उसके दर्ज मालिक से जुड़ी जानकारी को आसानी से सत्यापित किया जा सकेगा।

RTC कर्नाटक में जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेज है। इसमें भूमि के अधिकार, किरायेदारी और फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। जमीन खरीदने-बेचने से लेकर विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में इसकी आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी का सटीक और अद्यतन होना महत्वपूर्ण है।

डिजिटल रूप से जुड़ेगा जमीन का रिकॉर्ड

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में अलग-अलग डिजिटल डेटाबेस को एक-दूसरे से जोड़ना शामिल है। सरकार चाहती है कि जमीन के दस्तावेज केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहें, बल्कि उनसे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध और सत्यापन योग्य हो।

इससे राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ जमीन मालिकों और संबंधित पक्षों को रिकॉर्ड की जांच करने में आसानी होने की उम्मीद है। जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से एकीकृत करने का उद्देश्य अलग-अलग विभागों में उपलब्ध सूचनाओं के बीच अंतर को कम करना भी है।

नए RTC में ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे दस्तावेज में दर्ज जमीन की पहचान और वास्तविक भौगोलिक स्थिति का बेहतर मिलान किया जा सके। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रिकॉर्ड में दर्ज भूखंड वास्तव में किस स्थान पर मौजूद है।

आधार से जोड़ने की तैयारी

नए RTC को आधार से जोड़ने की योजना भी प्रस्तावित बदलाव का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्ति की पहचान को बेहतर तरीके से सत्यापित करना है। हालांकि आधार से जुड़ी किसी भी व्यवस्था का क्रियान्वयन लागू कानूनी प्रावधानों और डेटा सुरक्षा नियमों के तहत किया जाना होगा।

सरकार का मानना है कि पहचान संबंधी रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित करने से गलत नाम, एक ही व्यक्ति की अलग-अलग पहचान या रिकॉर्ड से जुड़ी अन्य विसंगतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

भूमि रिकॉर्ड में गलत या पुरानी जानकारी कई बार संपत्ति विवाद का कारण बनती है। डिजिटल सत्यापन और पहचान से जुड़ी अतिरिक्त व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों को कम करने की कोशिश की जाएगी।

लोकेशन के आधार पर भी होगा सत्यापन

नए RTC की एक और खासियत जमीन को उसकी लोकेशन के आधार पर सत्यापित करने की क्षमता होगी। भूमि रिकॉर्ड को भू-स्थानिक जानकारी से जोड़ने पर रिकॉर्ड में दर्ज सर्वे नंबर और वास्तविक जमीन के बीच संबंध को अधिक स्पष्ट बनाया जा सकता है।

इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को भी संपत्ति की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। जमीन से संबंधित लेनदेन में खरीदार के लिए यह जानना जरूरी होता है कि दस्तावेज में दिखाई गई जमीन वास्तव में कहां है और उसकी सीमाएं क्या हैं।

तकनीक आधारित लोकेशन सत्यापन व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू होने पर संपत्ति की पहचान से जुड़े विवादों और भ्रम को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

20 लाख नए RTC जारी करने की तैयारी

राजस्व विभाग के मुताबिक बदलाव को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार कटारिया ने कहा है कि अगले कुछ महीनों में कम से कम 20 लाख नए डिजाइन वाले RTC जारी किए जाएंगे।

इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेज जारी करना राज्य के भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। शुरुआती चरण के अनुभवों के आधार पर व्यवस्था में आगे सुधार किए जाने की गुंजाइश भी रहेगी।

नई प्रणाली के जरिए सरकार भूमि रिकॉर्ड को केवल डिजिटल बनाने के बजाय अलग-अलग जानकारियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

जमीन के मालिकाना हक की स्थिति होगी ज्यादा स्पष्ट

इस बदलाव का प्रमुख उद्देश्य अचल संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर स्पष्टता बढ़ाना है। जमीन के दस्तावेज में दर्ज जानकारी, मालिक की पहचान और जमीन की लोकेशन के बीच बेहतर तालमेल होने पर रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।

हालांकि RTC जैसे राजस्व रिकॉर्ड की कानूनी भूमिका और स्वामित्व से जुड़े अंतिम अधिकार लागू भूमि कानूनों तथा अन्य वैध दस्तावेजों पर निर्भर करते हैं। इसलिए नए RTC को अपने आप हर प्रकार के संपत्ति विवाद का अंतिम समाधान मानना उचित नहीं होगा।

फिर भी रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को कम करने और जानकारी तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में नई व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

जमीन खरीदने वालों को भी मिल सकता है फायदा

डिजिटल और लोकेशन आधारित सत्यापन की व्यवस्था से जमीन खरीदने से पहले रिकॉर्ड जांचना आसान हो सकता है। खरीदार संपत्ति से संबंधित जानकारी की पुष्टि अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकेंगे। इससे जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसी तरह बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए भी भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन उपयोगी हो सकता है, खासकर जब जमीन को ऋण के लिए संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने की कोशिश

कर्नाटक लंबे समय से भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर काम करता रहा है। नए डिजाइन वाले RTC के जरिए इस प्रक्रिया को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है। इसमें पहचान, जमीन की भौगोलिक स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित रूप से जोड़ने पर जोर रहेगा।

अगले कुछ महीनों में 20 लाख नए RTC जारी करने का लक्ष्य इस बदलाव के बड़े पैमाने को दर्शाता है। इसके क्रियान्वयन के बाद यह स्पष्ट होगा कि नई प्रणाली जमीन मालिकों, खरीदारों और राजस्व प्रशासन के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है।

फिलहाल सरकार की योजना भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और आसानी से सत्यापन योग्य बनाने की है। नई व्यवस्था सफल रही तो जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच आसान होने के साथ रिकॉर्ड की सटीकता और संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

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