कलबुर्गी। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कमलापुर तालुक स्थित महागांव क्रॉस में एक पुलिस कॉन्स्टेबल पर महिला से बीच सड़क मारपीट करने, उसके घर का दरवाजा तोड़ने और घर में रखे कपड़ों तथा प्लास्टिक शीट में आग लगाने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के बाद महिला के पति ने महागांव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।

आरोपी की पहचान चिंचोली पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल राजशेखर वरनल के रूप में बताई गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुताबिक वह इससे पहले करीब तीन से चार साल तक महागांव पुलिस स्टेशन में तैनात रह चुका था।

मामले में कॉन्स्टेबल और महिला के बीच पहले से परिचय होने की बात सामने आई है। दोनों के बीच कथित निजी संबंधों को लेकर भी दावे किए गए हैं। हालांकि इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि और जांच जरूरी है, इसलिए इसे शिकायत और स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पहले महागांव थाने में था तैनात

जानकारी के मुताबिक राजशेखर वरनल पहले महागांव पुलिस स्टेशन में काम करता था। इसी दौरान उसका महागांव क्रॉस इलाके में आना-जाना था। महिला के रिश्तेदारों की ओर से कथित संबंधों को लेकर शिकायत किए जाने के बाद उसका तबादला चिंचोली पुलिस स्टेशन कर दिया गया था।

आरोप है कि तबादले के बावजूद राजशेखर ने महागांव क्रॉस क्षेत्र से अपना संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं किया। बताया जा रहा है कि बच्चों की पढ़ाई का हवाला देकर वह इलाके में रहने लगा था।

इसी बीच रविवार शाम हुई घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। महिला के पति की शिकायत के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और घटना से पहले दोनों पक्षों के बीच क्या हुआ था।

सड़क पर महिला से मारपीट का आरोप

शिकायत के मुताबिक रविवार शाम आरोपी कॉन्स्टेबल महिला को अपने साथ लेकर गया और बाद में सड़क के बीच उसके साथ मारपीट की। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने कथित तौर पर हंगामा देखा।

आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद कॉन्स्टेबल महिला के घर पहुंचा और वहां भी आक्रामक व्यवहार किया। उसने कथित रूप से पत्थर उठाकर घर का दरवाजा तोड़ दिया और अंदर प्रवेश कर गया।

इसके बाद घर में मौजूद कपड़ों और प्लास्टिक की शीटों में आग लगाने का आरोप है। आग और हंगामा देखकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी।

घर में आग लगाने का भी आरोप

घर के अंदर सामान में आग लगाए जाने से स्थिति और गंभीर हो गई। गनीमत रही कि उपलब्ध जानकारी में किसी व्यक्ति के आग की चपेट में आने की बात सामने नहीं आई है। हालांकि घर में आग लगाने के आरोप के कारण संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

पुलिस के लिए यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा कि आग किस तरह लगाई गई, कितना सामान क्षतिग्रस्त हुआ और घटना के समय घर में कौन-कौन मौजूद था।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान भी मामले में अहम हो सकते हैं। यदि आसपास CCTV कैमरे लगे हैं तो उनके फुटेज से घटनाक्रम की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।

10 लाख रुपये और सोने की मांग का आरोप

मामले में आर्थिक लेनदेन से जुड़ा आरोप भी सामने आया है। शिकायत के मुताबिक पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद आरोपी कॉन्स्टेबल ने दावा किया कि महिला को उसे 10 लाख रुपये नकद और सोना देना था।

जब महिला से इस बारे में पूछा गया तो उसने कथित तौर पर कहा कि उसके पास देने के लिए नकदी या सोना नहीं है। इसके बाद यह सवाल भी जांच का हिस्सा बन गया है कि 10 लाख रुपये और सोने की कथित मांग किस आधार पर की जा रही थी।

फिलहाल इस आर्थिक दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान, वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।

पति ने थाने में दी शिकायत

घटना के बाद महिला के पति ने महागांव पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इसमें कॉन्स्टेबल पर महिला से मारपीट, घर में जबरन घुसने, दरवाजा तोड़ने और सामान में आग लगाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

अब पुलिस शिकायत के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। आरोपी खुद पुलिस विभाग में कार्यरत होने के कारण मामले पर स्थानीय स्तर पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आरोप लगने की स्थिति में आपराधिक जांच के अलावा विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई संभव होती है। हालांकि आरोपी कॉन्स्टेबल के खिलाफ कौन-कौन सी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं या उसके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

निजी संबंधों के दावे की भी होगी जांच

इस घटना में महिला और कॉन्स्टेबल के बीच कथित निजी संबंधों का दावा सामने आया है, लेकिन ऐसी व्यक्तिगत जानकारी को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

पुलिस को यह पता लगाना होगा कि दोनों के बीच विवाद की वास्तविक वजह क्या थी। आर्थिक लेनदेन का मामला था या कोई दूसरा निजी विवाद, इसका पता जांच और संबंधित लोगों के बयानों के बाद ही चल सकेगा।

इसी तरह पहले की शिकायत और कॉन्स्टेबल के तबादले के बीच सीधा संबंध था या नहीं, इसकी भी आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि आवश्यक होगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हो सकते हैं अहम

घटना कथित तौर पर सार्वजनिक स्थान पर शुरू हुई थी और बाद में महिला के घर तक पहुंची। ऐसे में आसपास मौजूद लोगों के बयान जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस घटनास्थल से भौतिक साक्ष्य जुटाने के साथ क्षतिग्रस्त दरवाजे और जले हुए सामान की जांच कर सकती है। मोबाइल वीडियो या CCTV फुटेज उपलब्ध होने पर उनसे भी आरोपों की पुष्टि में मदद मिल सकती है।

फिलहाल महिला के पति की शिकायत के आधार पर मामला सामने आया है और आरोपों की जांच बाकी है। इसलिए आरोपी कॉन्स्टेबल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

महागांव क्रॉस में हुई इस घटना ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि आरोप एक पुलिसकर्मी पर लगे हैं। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि महिला से मारपीट, घर में जबरन प्रवेश, आगजनी और कथित आर्थिक मांग से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई की जाती है।

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