बेंगलुरु। कर्नाटक में अगले महीने होने वाले दशहरा समारोह की तैयारियों के बीच डिप्टी सीएम डॉ. जी. परमेश्वर ने अधिकारियों को सरकारी और सार्वजनिक कामकाज प्रभावित नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दशहरा समारोह के नाम पर किसी भी जरूरी सरकारी काम को रोका नहीं जाना चाहिए। खास तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े काम में लगे अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी तय समय पर पूरी करने के लिए कहा गया है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि त्योहार और सरकारी जिम्मेदारियां दोनों साथ-साथ चलनी चाहिए। दशहरा राज्य के प्रमुख उत्सवों में शामिल है और प्रशासन की बड़ी टीम इसके आयोजन तथा व्यवस्थाओं में लगती है, लेकिन इसकी वजह से आम लोगों से जुड़े काम या निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने जिला स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर रहने को कहा। उनके मुताबिक जिला कलेक्टर, तहसीलदार और विलेज एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (VAO) समेत संबंधित अधिकारियों को SIR से जुड़े काम निर्धारित समय के भीतर पूरे करने होंगे।

SIR के काम में लापरवाही नहीं

डिप्टी सीएम ने विशेष रूप से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जुड़े काम को दशहरा की व्यस्तता के कारण टाला नहीं जा सकता। निर्वाचन संबंधी काम तय समय सीमा के तहत पूरे किए जाते हैं और इसमें लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों को जो जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उन्हें पूरा करना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित काम नहीं करता है तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।

SIR के तहत मतदाता सूची में दर्ज विवरणों की जांच, आवश्यक सत्यापन और संबंधित निर्वाचन कार्य किए जाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

दशहरा और सरकारी काम साथ-साथ

डिप्टी सीएम का जोर इस बात पर रहा कि दशहरा समारोह का आयोजन सरकारी कामकाज रोककर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्सव से संबंधित जिम्मेदारियों और नियमित प्रशासनिक काम के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।

दशहरा के दौरान कई विभागों के अधिकारी सुरक्षा, यातायात, सफाई, स्वास्थ्य, पर्यटन और दूसरी व्यवस्थाओं में व्यस्त रहते हैं। ऐसे समय में नियमित सरकारी सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए अधिकारियों को पहले से निर्देश दिए गए हैं कि जरूरी सेवाएं और जनहित के कार्य चलते रहें।

जिला प्रशासन की बढ़ेगी जिम्मेदारी

दशहरा के दौरान जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। जिला कलेक्टर और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को समारोह की तैयारियों के साथ नियमित राजस्व और प्रशासनिक काम भी देखना होगा।

इसके अलावा SIR की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को मतदाता सत्यापन और दूसरे निर्वाचन कार्यों को निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ाना होगा। अधिकारियों को इसके लिए कर्मचारियों और संसाधनों का उचित प्रबंधन करने की जरूरत होगी।

सरकार का संदेश है कि त्योहार की तैयारियों को किसी लंबित सरकारी काम के लिए कारण नहीं बनाया जाए।

चुनाव आयोग कर सकता है कार्रवाई

डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए चुनाव आयोग की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन से जुड़ी जिम्मेदारी पूरी नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आयोग कार्रवाई कर सकता है।

निर्वाचन संबंधी कार्यों में लगे अधिकारियों पर तय समय सीमा के भीतर जिम्मेदारियां पूरी करने का दबाव रहता है। SIR जैसे बड़े अभियान में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन किया जाता है। ऐसे में किसी क्षेत्र में काम रुकने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इसी कारण अधिकारियों से कहा गया है कि दशहरा के दौरान भी निर्वाचन संबंधी काम नियमित रूप से जारी रखें।

आम लोगों के काम भी नहीं हों प्रभावित

निर्देश केवल SIR तक सीमित नहीं हैं। डिप्टी सीएम ने व्यापक रूप से सार्वजनिक और सरकारी कामकाज को जारी रखने पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि प्रशासनिक कार्यालयों में लोगों से जुड़े जरूरी काम भी त्योहार की तैयारियों के कारण अनावश्यक रूप से नहीं रुकने चाहिए।

राजस्व संबंधी काम, प्रमाणपत्र, स्थानीय प्रशासन से जुड़ी सेवाएं और अन्य जरूरी कार्य सामान्य व्यवस्था के तहत जारी रखने पर जोर दिया गया है।

त्योहार के समय बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी अलग-अलग व्यवस्थाओं में लगाई जाती है। ऐसे में विभागों को इस तरह कर्मचारियों की तैनाती करनी होगी कि समारोह और नियमित काम दोनों प्रभावित न हों।

दशहरा की तैयारियों के बीच सख्त संदेश

कर्नाटक में दशहरा बड़े स्तर पर मनाया जाता है। खास तौर पर मैसूर दशहरा देशभर में प्रसिद्ध है और इसमें बड़ी संख्या में पर्यटक तथा श्रद्धालु पहुंचते हैं। आयोजन को लेकर प्रशासन कई सप्ताह पहले से तैयारियां शुरू कर देता है।

सुरक्षा व्यवस्था से लेकर यातायात प्रबंधन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक बड़ी संख्या में अधिकारी आयोजन से जुड़े रहते हैं। इसी वजह से सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आयोजन की व्यस्तता नियमित सरकारी जिम्मेदारियों पर भारी नहीं पड़नी चाहिए।

अधिकारियों को बनाना होगा संतुलन

अब जिला और स्थानीय स्तर के अधिकारियों को दशहरा की तैयारियों और नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना होगा। विशेष रूप से SIR से जुड़े काम की समय सीमा को देखते हुए इसमें किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

डिप्टी सीएम का संदेश स्पष्ट है कि दशहरा पूरी भव्यता के साथ मनाया जाए, लेकिन उसके नाम पर जरूरी सरकारी और सार्वजनिक काम नहीं रुकना चाहिए। निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों में लापरवाही होने पर चुनाव आयोग की कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे में अगले महीने त्योहार की व्यस्तता के बीच सरकारी कार्यालयों और निर्वाचन से जुड़े कर्मचारियों पर दोनों जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करने का दबाव रहेगा।

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