कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक की रणनीति तैयार, जल्द बुलाई जाएगी सर्वदलीय बैठक

Update: 2026-07-29 08:23 GMT

बेंगलुरु। तमिलनाडु के साथ जारी कावेरी जल बंटवारे के विवाद को लेकर कर्नाटक सरकार ने आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने संकेत दिए हैं कि कावेरी जल मामले में आगे के कदमों को लेकर कानूनी विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाएगी।

कावेरी जल नियंत्रण समिति (CWRC) की ओर से कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने के निर्देश दिए जाने के बाद राज्य में विरोध तेज हो गया है। कर्नाटक के कई हिस्सों और राजधानी बेंगलुरु में इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राज्य के जल संसाधनों और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार उचित कदम उठाए।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जल विवाद एक संवेदनशील विषय है और इस पर सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में कानूनी विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

सर्वदलीय बैठक में बनेगी रणनीति

कर्नाटक सरकार का मानना है कि कावेरी जैसे महत्वपूर्ण जल विवाद पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी की जा रही है। बैठक में राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सरकार की कोशिश है कि इस मुद्दे पर राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जाए और केंद्र व संबंधित प्राधिकरणों के सामने कर्नाटक की चिंताओं को प्रभावी तरीके से उठाया जाए। बैठक में कानूनी विशेषज्ञों की राय और जल उपलब्धता से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।

CWRC के आदेश पर कर्नाटक में नाराजगी

कावेरी जल नियंत्रण समिति के निर्देश के बाद कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य में पहले से ही जल संकट की स्थिति बनी हुई है और ऐसे समय में तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी छोड़ना किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।

किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की जल जरूरतों को ध्यान में रखे बिना फैसला लिया गया है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की है कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से अपना पक्ष रखे।

बेंगलुरु सहित राज्य के कई इलाकों में हुए प्रदर्शनों में लोगों ने CWRC के निर्देशों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कावेरी नदी राज्य के लाखों किसानों और आम लोगों की जीवनरेखा है, इसलिए पानी के बंटवारे में संतुलन जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के मामले में कानूनी विशेषज्ञों की टीम से चर्चा करेंगे। सरकार यह समझने का प्रयास कर रही है कि मौजूदा परिस्थितियों में उसके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।

कावेरी जल विवाद कई दशकों से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बना हुआ है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। इस मामले में न्यायिक फैसलों और जल प्रबंधन संस्थाओं के निर्देशों के आधार पर राज्यों के बीच पानी का वितरण किया जाता है।

किसानों की चिंता बनी मुद्दा

कर्नाटक में इस विवाद का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है। राज्य के कई किसान संगठन लगातार मांग करते रहे हैं कि पहले राज्य की पेयजल और कृषि जरूरतों को पूरा किया जाए। उनका कहना है कि बारिश की स्थिति और जलाशयों में उपलब्ध पानी को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।

सरकार भी किसानों की चिंताओं को देखते हुए मामले को गंभीरता से ले रही है। अधिकारियों के अनुसार, जलाशयों में पानी की उपलब्धता, मौसम की स्थिति और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है।

विवाद के समाधान की कोशिश

कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक सरकार अब राजनीतिक सहमति और कानूनी प्रक्रिया दोनों के माध्यम से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। सर्वदलीय बैठक के जरिए जहां राज्य के भीतर एकजुटता बनाने की कोशिश होगी, वहीं कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल CWRC के आदेश के खिलाफ राज्य में विरोध जारी है। आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति और कानूनी कदमों पर सभी की नजर रहेगी। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया है और इसका समाधान दोनों राज्यों के हितों के संतुलन पर निर्भर करेगा।

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