Karnataka कर्नाटक: विधानसभा में नामांकन के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायत ग्राम स्तर पर 'गारंटी कमेटियन' को सरकारी प्रमाण पत्र के रूप में मान्यता देने की कोशिश की जा रही है। आर. अशोक ने इसे जनता के कर के पैसे का गलत उपयोग किये गये सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सवाल करते हुए कहा कि कथित 'गारंटी समिति' वास्तव में एक "खिचड़ी केंद्र" बन गई है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस के नेताओं और समितियों को लाभ पहुंचाना बताया जा रहा है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था जनता के पैसे से राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास है।
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से ही खराब है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में कई सरकारी वेबसाइटें हैं और इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को अभी तक छात्र-छात्राएं और यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कई प्राचीन काल के पुस्तकालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों के लिए पोषण कार्यक्रम के तहत आवश्यक अंडा एंजाइम सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
किसानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए आर. अशोक ने कहा कि बाजार ओबेने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के उत्पाद भुगतान के लिए लगातार सरकारी किसानों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है। उनके अनुसार, यह स्थिति ग्रामीण उद्योगों की गंभीर समस्या है।
बिजनेस लीडर्स ने आरोप लगाया कि ऐसे समय में जब राज्य में विकास कार्य और शैक्षणिक गतिविधियां धन की कमी से प्रभावित हुई हैं, तब सरकार कथित रूप से 'गारंटी कमेटियों' के माध्यम से राजनीतिक विचारधारा और व्यंग्यात्मक नेताओं को जनता के बीच उपयोग करने का आरोप लगा रही है।
उन्होंने इसे "शर्मनाक" कहते हुए कहा कि सार्वजानिक धन के लिए सार्वजानिक धन का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह व्यवस्थापन सार्वजानिक मण्डली को सामान्य जनता की अनदेखी कर रही है।
आर. अशोक ने सरकार से इस पूरे लैपटॉप पर स्पष्टता देने की मांग की है और कहा है कि जनता के पैसे का उपयोग सहायक उपकरण और प्लास्टिक के साथ होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी व्यवस्थाएं जारी रहती हैं तो इससे राज्य की वित्तीय स्थिति और अधिक प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर, आर. अशोक के इन दावों ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है, जहां एक तरफ अपनी सरकार की मंजूरी को जमीनी स्तर पर लागू करने का दावा कर रही है, वहीं समेकन इसे धन के गठबंधन और राजनीतिक लाभ से जुड़ाव देख रही है।