बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने कृषि विभाग में एग्रीकल्चर ऑफिसर (AO) और असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (AAO) के पदों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा 8 और 9 अगस्त को आयोजित होनी थी, लेकिन कृषि छात्रों के लगातार विरोध और उनकी मांगों को देखते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परीक्षा टालने की घोषणा की। सरकार के इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जबकि अब नई परीक्षा तिथि बाद में घोषित की जाएगी।
परीक्षा स्थगित करने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्यभर के कृषि विश्वविद्यालयों के छात्र कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का मुख्य विरोध कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) के उस निर्णय को लेकर था, जिसमें एग्रीकल्चर ऑफिसर और असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर के पदों के लिए बीई और बीटेक डिग्रीधारकों को भी आवेदन करने की अनुमति दी गई थी।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि कृषि विभाग के तकनीकी पदों पर केवल कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को ही अवसर मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि इन पदों की प्रकृति पूरी तरह कृषि आधारित है और इसके लिए कृषि विषय का विशेष ज्ञान आवश्यक है। ऐसे में इंजीनियरिंग स्नातकों को पात्रता देने से कृषि स्नातकों के साथ अन्याय होगा।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि छात्रों की आपत्तियों और मांगों को गंभीरता से लिया गया है। इसी कारण सरकार ने फिलहाल परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया है ताकि सभी पक्षों से चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संशोधित भर्ती प्रक्रिया में बीई और बीटेक उम्मीदवारों को पात्रता सूची से बाहर किया जाएगा या नहीं।
इस मुद्दे पर विरोध कर रहे छात्रों ने 4 अगस्त को गांधी कृषि विज्ञान केंद्र (GKVK) और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (UAS) के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपते हुए भर्ती नियमों में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातकों ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में करियर बनाने के उद्देश्य से पढ़ाई की है और यदि अन्य विषयों के अभ्यर्थियों को भी समान अवसर दिया गया तो उनके रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे।
छात्र संगठनों ने यह भी कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के साथ सीधे काम करते हैं। उन्हें फसल प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण, कृषि विस्तार सेवाओं, कीट एवं रोग नियंत्रण, बीज उत्पादन और सरकारी कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। इसलिए इन पदों के लिए कृषि विषय में विशेषज्ञता रखने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति आवश्यक है।
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कृषि में इंजीनियरिंग और तकनीक की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। कृषि मशीनरी, सिंचाई तकनीक, ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले युवाओं का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित विभागों को लेना है।
परीक्षा स्थगित होने से उन अभ्यर्थियों में भी असमंजस की स्थिति है, जिन्होंने लंबे समय से इसकी तैयारी की थी। अब सभी उम्मीदवार नई परीक्षा तिथि और संशोधित पात्रता नियमों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) से उम्मीद की जा रही है कि वह राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार संशोधित कार्यक्रम जारी करेगा। साथ ही, पात्रता संबंधी विवाद को लेकर कृषि विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से संचालित की जाएगी। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी भी वर्ग के उम्मीदवारों के साथ अन्याय किए बिना योग्य अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित करना है।
फिलहाल कृषि छात्रों का आंदोलन सरकार के इस फैसले के बाद शांत होता दिखाई दे रहा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांग—इन पदों के लिए केवल कृषि स्नातकों को पात्रता देने—पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
अब सभी की नजरें राज्य सरकार और कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण के अगले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि उसी के आधार पर परीक्षा की नई तारीख, संशोधित पात्रता मानदंड और भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय होगी।