बेंगलुरु। कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड (KRIDL) में कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि KRIDL में अनियमितताओं से संबंधित कांग्रेस विधायक के. अशोक कुमार राय का पत्र सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भाजपा ने मामले में कथित रूप से शामिल अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
भाजपा विधायक और पार्टी महासचिव वी. सुनील कुमार ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में लागू की जा रही विभिन्न योजनाओं में अतिरिक्त खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब खर्च में 7 प्रतिशत का कथित “मिनिस्ट्रियल चार्ज” भी जोड़ा जा रहा है।
सुनील कुमार ने कहा कि कांग्रेस विधायक के. अशोक कुमार राय द्वारा लिखा गया पत्र KRIDL में कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। भाजपा नेता ने दावा किया कि यह पत्र राज्य सरकार के भीतर चल रही व्यवस्था को उजागर करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस विधायक के पत्र को बनाया मुद्दा
भाजपा ने अपने आरोपों के समर्थन में कांग्रेस विधायक के. अशोक कुमार राय के कथित पत्र को प्रमुख आधार बनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब सत्तारूढ़ दल का विधायक स्वयं किसी सरकारी संस्था में अनियमितताओं से संबंधित मुद्दे उठा रहा है तो सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का नया तरीका सामने आ रहा है। उनके अनुसार विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान अतिरिक्त खर्च बढ़ने से सरकारी धन पर बोझ पड़ रहा है।
भाजपा ने सरकार से मांग की है कि विधायक के पत्र में उठाए गए बिंदुओं की जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
7 प्रतिशत मिनिस्ट्रियल चार्ज का आरोप
सुनील कुमार ने दावा किया कि विभिन्न योजनाओं में पहले से मौजूद खर्च के अलावा अब 7 प्रतिशत “मिनिस्ट्रियल चार्ज” के नाम पर अतिरिक्त राशि जोड़ी जा रही है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि सरकारी परियोजनाओं में इस तरह के अतिरिक्त खर्च से भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है। उन्होंने दावा किया कि KRIDL से जुड़े मामले ने इस कथित व्यवस्था को उजागर किया है।
हालांकि भाजपा द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। सरकार या संबंधित संस्था की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मंत्रियों पर भी लगाए गंभीर आरोप
सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि राज्य में कथित रूप से “पेमेंट कोटा” के जरिए धन वसूली की व्यवस्था शुरू हो गई है। उन्होंने इसे सरकार में भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता ने दावा किया कि विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए जारी धन में अतिरिक्त खर्च और कथित कमीशन का असर अंततः विकास कार्यों पर पड़ता है।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि KRIDL में भुगतान और परियोजनाओं से जुड़ी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही है और विधायक के पत्र में उठाए गए मुद्दों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
आर अशोक ने की निलंबन की मांग
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी KRIDL के मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने मांग की कि कथित कमीशन घोटाले में शामिल अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए।
आर. अशोक ने कहा कि केवल विभागीय स्तर पर स्पष्टीकरण लेना पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच में भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मामले की पारदर्शी जांच कराने और जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार पदों से हटाने की मांग की।
KRIDL की कार्यप्रणाली पर सवाल
KRIDL ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे से संबंधित विभिन्न विकास कार्यों के क्रियान्वयन से जुड़ी संस्था है। ऐसे में संस्था पर भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप लगना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रामीण विकास परियोजनाओं में सड़क, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं। इन परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में सरकारी धन खर्च होता है। इसलिए भाजपा का कहना है कि प्रत्येक भुगतान और खर्च में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्ष ने मांग की है कि KRIDL की संबंधित परियोजनाओं और भुगतानों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कथित अतिरिक्त शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा था।
कांग्रेस सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
कांग्रेस विधायक के पत्र का हवाला देकर भाजपा ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से और धार देने की कोशिश की है। विपक्ष का तर्क है कि आरोप किसी बाहरी व्यक्ति की शिकायत पर आधारित नहीं हैं बल्कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के ही एक विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों से जुड़े हैं।
भाजपा इसे सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे तत्काल जांच के आदेश देने चाहिए।
दूसरी ओर, पूरे मामले में कांग्रेस सरकार और KRIDL का विस्तृत पक्ष महत्वपूर्ण होगा। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया से ही यह साफ हो सकेगा कि 7 प्रतिशत के कथित शुल्क और अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।
जांच की मांग हुई तेज
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के पद पर बने रहने से प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।
इसी आधार पर उन्होंने पहले निलंबन और उसके बाद विस्तृत जांच की मांग की है। साथ ही कथित अनियमितताओं में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की बात कही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक धन से चलने वाली परियोजनाओं में किसी भी तरह की कमीशनखोरी या अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर
KRIDL को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद अब कांग्रेस सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया पर नजर है। आरोपों की प्रकृति गंभीर होने के कारण यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।
सरकार यदि मामले की जांच का आदेश देती है तो जांच के निष्कर्षों से ही आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी। वहीं यदि आरोपों को निराधार बताया जाता है तो विपक्ष इस मुद्दे पर दस्तावेज सार्वजनिक करने या स्वतंत्र जांच की मांग को और तेज कर सकता है।
फिलहाल भाजपा ने कांग्रेस विधायक के. अशोक कुमार राय के पत्र को आधार बनाकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वी. सुनील कुमार ने कथित 7 प्रतिशत “मिनिस्ट्रियल चार्ज” और “पेमेंट कोटा” पर सवाल उठाए हैं, जबकि आर. अशोक ने कथित कमीशन घोटाले में शामिल अधिकारियों को निलंबित कर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। अब इस विवाद की दिशा सरकार के जवाब और संभावित जांच पर निर्भर करेगी।