Karnataka कर्नाटक। भारतीय कॉफी उद्योग के लिए यूरोपीय बाजार में नई संभावनाएं खुल गई हैं। भारतीय कॉफी रोस्टर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्रीकांत राव ने कहा कि हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से कॉफी निर्यातकों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। यह समझौता यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) पहुंच प्रदान करता है, जिससे भारतीय कॉफी निर्यातकों को लंबे समय तक स्थिरता और निवेश की स्पष्टता मिलती है।
श्रीकांत राव ने बताया कि यह समझौता न केवल बड़े पैमाने पर निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि कॉफी उद्योग को मूल्य वर्धित उत्पादों, प्रीमियम कॉफी और ब्रांडेड सेगमेंट में विस्तार करने का अवसर भी देगा। उन्होंने कहा, "यह समझौता निवेशकों को प्रीमियम कॉफी और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में मशीनरी अपग्रेड करने और निर्यात बढ़ाने की रणनीति बनाने में मदद करेगा। वर्तमान में प्रीमियम सेगमेंट में प्रमुख हिस्सा कमोडिटी मार्केट द्वारा नियंत्रित है, जिसे अब भारतीय कंपनियां चुनौती दे सकती हैं।"
विशेषज्ञों के अनुसार, इस एफटीए से भारतीय कॉफी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी। कॉफी निर्यातक अब यूरोपीय बाजार में अपने ब्रांडेड उत्पादों को बेहतर कीमत और अधिक अवसर के साथ पेश कर सकेंगे। इस समझौते से छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों के लिए भी प्रीमियम सेगमेंट में प्रवेश आसान होगा, जिससे उद्योग के समग्र विकास को गति मिलेगी।
श्रीकांत राव ने यह भी कहा कि एफटीए से कॉफी उद्योग को न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि तकनीकी उन्नयन और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। निर्यातकों को मशीनरी में निवेश करने, गुणवत्ता मानकों को सुधारने और उत्पादन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा। यह कदम भारतीय कॉफी को वैश्विक स्तर पर मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कॉफी उत्पादकों और निर्यातकों ने इस समझौते का स्वागत किया है और कहा है कि यह उद्योग की विकास क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में भारतीय कॉफी का यूरोपीय बाजार में हिस्सा बढ़ने की संभावना है, जिससे किसानों, रोस्टरों और निर्यातकों को लाभ होगा।
इस एफटीए के परिणामस्वरूप भारत प्रीमियम कॉफी के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर सकेगा और वैश्विक कॉफी व्यापार में प्रतिस्पर्धा के नए अवसर तलाश सकेगा। भारतीय कॉफी उद्योग के लिए यह समझौता लंबी अवधि में निवेश, उत्पादन और निर्यात वृद्धि का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।