Bengaluru में IESA Vision Summit: सेमीकंडक्टर उद्योग की वैश्विक चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा
बेंगलुरु Bengaluru: IESA Vision Summit में IESA के अध्यक्ष अशोक चंदक ने सेमीकंडक्टर उद्योग की वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर का व्यवसाय हमेशा वैश्विक होता है और कोई भी देश पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है। इसके कारण विभिन्न देशों के विशेषज्ञता क्षेत्रों में विभाजन और सहयोग आवश्यक होता है।
चंदक ने बताया कि अमेरिकी कंपनियों का इस उद्योग में प्रमुख योगदान है। वे आईपी इनोवेशन और डिज़ाइन में अग्रणी हैं और वैश्विक मार्केट में 50% से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। इसके साथ ही, ताइवान ने फाउंड्री मॉडल के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस में खुद को स्थापित किया है। वहीं, जापान ने आपूर्ति श्रृंखला विशेषज्ञता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर फोकस किया है।
उन्होंने कहा कि भारत को इस वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। इसके लिए रिसर्च, डिज़ाइन और निर्माण के क्षेत्र में रणनीतिक निवेश और नीति समर्थन जरूरी है। भारत में सेमीकंडक्टर के विकास के लिए स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाना होगा, ताकि नवाचार और उत्पादन दोनों क्षेत्र में संतुलन बना रहे।
अशोक चंदक ने यह भी बताया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मानव संसाधन और आधुनिक टेक्नोलॉजी का विकास जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और पैकेजिंग को एकीकृत करके वैश्विक मांग में भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।
IESA Vision Summit ने इस उद्योग की चुनौतियों, अवसरों और वैश्विक सहयोग के महत्व पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए रणनीतिक कदम उठाना अब वक्त की मांग है, ताकि देश वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में मजबूती से स्थापित हो सके।