बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य के प्रवासी भारतीयों (NRIs), विदेशी निवेशकों और वैश्विक संगठनों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने गुरुवार को ‘ग्लोबल इन्वेस्टमेंट एंड ओवरसीज अफेयर्स डिपार्टमेंट’ (वैश्विक निवेश और प्रवासी मामलों का विभाग) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस नए विभाग का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले कर्नाटक के लोगों से बेहतर संपर्क स्थापित करना, विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर राज्य की भागीदारी को मजबूत करना है। सरकार का कहना है कि यह विभाग प्रवासी भारतीयों की समस्याओं के समाधान और निवेश से जुड़े मामलों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में काम करेगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, इस विभाग के लिए अलग मंत्रालय और मंत्री की व्यवस्था होगी। हालांकि, शुरुआती चरण में यह विभाग मुख्यमंत्री की निगरानी में काम करेगा।
NRIs के लिए बनेगा सिंगल विंडो सिस्टम
राज्य सरकार ने प्रवासी भारतीयों की सुविधा के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत विदेशों में रहने वाले कर्नाटक के लोग व्यापार, निवेश, रोजगार और अन्य जरूरतों से जुड़ी सेवाएं एक ही जगह से प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि NRIs को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें आवश्यक सहायता आसानी से उपलब्ध हो सके।
इस व्यवस्था के तहत प्रवासी भारतीयों को एक विशेष कार्ड भी जारी किया जाएगा। इस कार्ड के माध्यम से वे सरकारी सेवाओं और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी
कर्नाटक देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी राज्यों में शामिल है। बेंगलुरु आईटी, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान रखता है। ऐसे में सरकार अब विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहती है।
नए विभाग के जरिए विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए राज्य में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। इससे नए उद्योगों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
विदेशों में रोजगार के अवसरों पर भी फोकस
सरकार ने इस विभाग को केवल निवेश तक सीमित नहीं रखा है। इसका एक उद्देश्य विदेशों में रोजगार के अवसरों से जुड़े मामलों में भी सहायता प्रदान करना है।
प्रवासी कर्नाटकवासियों को विदेशों में नौकरी, कौशल विकास और अन्य आवश्यक सेवाओं से जोड़ने के लिए नई व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि विदेशों में रहने वाले कर्नाटक के लोग राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुभव, निवेश और वैश्विक संपर्कों का उपयोग राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए किया जा सकता है।
वैश्विक स्तर पर कर्नाटक की पहचान मजबूत करने की पहल
नए विभाग के गठन को कर्नाटक की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि राज्य को अंतरराष्ट्रीय निवेश और सहयोग के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जाए।
इसके जरिए विदेशी विश्वविद्यालयों, उद्योगों, संस्थानों और संगठनों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
प्रवासी भारतीयों की समस्याओं का होगा समाधान
विदेशों में रहने वाले भारतीयों को कई बार दस्तावेज, निवेश, सरकारी योजनाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नया विभाग इन समस्याओं के समाधान के लिए एक समन्वय केंद्र के रूप में काम करेगा।
सरकार का कहना है कि प्रवासी भारतीयों की जरूरतों को समझते हुए नीतियां तैयार की जाएंगी और उन्हें बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कैबिनेट के फैसले से नई उम्मीद
कर्नाटक सरकार के इस फैसले को राज्य के वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अलग विभाग बनने से निवेश, प्रवासी मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े कामों में तेजी आने की संभावना है।
फिलहाल नया विभाग मुख्यमंत्री की निगरानी में काम करेगा और आने वाले समय में इसके लिए अलग मंत्री और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि ग्लोबल इन्वेस्टमेंट एंड ओवरसीज अफेयर्स डिपार्टमेंट के जरिए कर्नाटक दुनिया भर में बसे अपने लोगों से जुड़ाव मजबूत करेगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में नई भूमिका निभाएगा।