कर्नाटक में FBOs को खाद्य सुरक्षा कमियां दूर करने के लिए 15 दिन की मोहलत
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने खाद्य कारोबार से जुड़े संचालकों यानी Food Business Operators (FBOs) को खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। यह निर्देश हाल में राज्यभर में चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान के दौरान सामने आई खामियों के बाद जारी किया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने सभी संबंधित कारोबारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में FBOs को सबसे पहले यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके पास वैध FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन मौजूद हो। खाद्य कारोबार संचालित करने के लिए आवश्यक लाइसेंस या पंजीकरण नहीं होने की स्थिति में संचालकों को नियमानुसार कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थ तैयार करने, बेचने, स्टोर करने या परोसने वाले कारोबारियों के लिए खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है।
विशेष निरीक्षण अभियान के दौरान अधिकारियों ने खाद्य प्रतिष्ठानों में कई तरह की कमियां पाई थीं। इनमें साफ-सफाई की अपर्याप्त व्यवस्था, खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखने में लापरवाही और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी कमियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को संभालने की प्रक्रिया और परिसर की सामान्य स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठे।
विभाग ने कारोबारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें। खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों, उपकरणों और बर्तनों की उचित सफाई की जानी चाहिए। खाद्य पदार्थ तैयार करने और परोसने वाले स्थानों को भी साफ और संक्रमण के संभावित स्रोतों से मुक्त रखना जरूरी होगा।
एडवाइजरी में खाद्य पदार्थों के भंडारण को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थों को उचित तरीके से अलग रखने, भोजन को दूषित होने से बचाने और आवश्यक तापमान पर रखने की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है। विभाग का मानना है कि भोजन के गलत तरीके से भंडारण और रखरखाव से खाद्य पदार्थ दूषित हो सकते हैं और इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
FBOs को व्यक्तिगत हाइजीन पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य पदार्थों को संभालने वाले कर्मचारियों को साफ कपड़े पहनने, हाथों की नियमित सफाई करने और काम के दौरान आवश्यक स्वच्छता मानकों का पालन करने को कहा गया है। किसी कर्मचारी के बीमार होने की स्थिति में उसे खाद्य पदार्थों के सीधे संपर्क वाले काम से दूर रखने जैसे एहतियाती कदमों का भी पालन किया जाना चाहिए।
निरीक्षण अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य प्रतिष्ठानों में सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना भी है। विभाग की एडवाइजरी को इसी दिशा में एक सुधारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। 15 दिन की समय सीमा देकर कारोबारियों को कमियों को दूर करने का अवसर दिया गया है।
विभाग के अधिकारियों द्वारा दोबारा निरीक्षण किए जाने की संभावना है। ऐसे में कारोबारियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर सभी कमियों को ठीक कर लें और आवश्यक दस्तावेज तथा लाइसेंस उपलब्ध रखें। यदि दोबारा निरीक्षण के दौरान वही कमियां पाई जाती हैं, तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
खाद्य कारोबार में लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कारोबारियों की पहचान और उनके संचालन की निगरानी की जा सके। उपभोक्ताओं के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय प्रतिष्ठान की स्वच्छता और वैध पंजीकरण से संबंधित जानकारी पर ध्यान दें।
राज्य में होटल, रेस्तरां, बेकरी, कैटरिंग यूनिट, किराना और अन्य खाद्य कारोबारों की संख्या बड़ी है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। विशेष निरीक्षण अभियान के जरिए विभाग ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा केवल भोजन की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण, तैयारी, पकाने, पैकिंग, परिवहन और बिक्री तक पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता जरूरी है। किसी एक चरण में लापरवाही होने पर भोजन दूषित हो सकता है। इसलिए विभाग ने FBOs को पूरे संचालन तंत्र की समीक्षा करने और जहां भी कमी हो, उसे दूर करने को कहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म और उमस वाले मौसम में खाद्य पदार्थों के खराब होने तथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में खाद्य कारोबारियों के लिए तापमान नियंत्रण, साफ पानी, उचित कचरा प्रबंधन और कीट नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। प्रतिष्ठानों में इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
कचरा प्रबंधन को लेकर भी खाद्य प्रतिष्ठानों को सावधानी बरतनी होगी। भोजन तैयार करने वाले स्थान के आसपास कचरा जमा होने से मक्खियों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों के दूषित होने की संभावना रहती है। इसलिए कचरे को समय पर हटाने और निर्धारित तरीके से निपटाने की व्यवस्था करना जरूरी होगा।
विभाग की एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब उपभोक्ता खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं। बाहर खाना खाने या पैक्ड फूड खरीदने वाले लोग अब साफ-सफाई और प्रतिष्ठान की विश्वसनीयता को भी महत्व देते हैं। ऐसे में FBOs के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना न केवल कानूनी आवश्यकता है, बल्कि कारोबार की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
अधिकारियों ने कारोबारियों से अपील की है कि वे 15 दिन की समय सीमा को गंभीरता से लें और निरीक्षण के दौरान सामने आई सभी कमियों को दूर करें। साथ ही भविष्य में ऐसी खामियां दोबारा सामने न आएं, इसके लिए नियमित आंतरिक जांच और कर्मचारियों को हाइजीन संबंधी प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान दिया जाए।
फिलहाल कर्नाटक FDA की ओर से जारी 15 दिन की समय सीमा के बाद विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि FBOs तय अवधि में सुधार कर लेते हैं तो इससे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। वहीं, नियमों की अनदेखी जारी रहने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
कर्नाटक सरकार का यह कदम राज्य में खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोबारा निरीक्षण और अनुपालन की स्थिति से पता चलेगा कि विशेष अभियान के बाद खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में कितना सुधार हुआ है।