बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मुख्य सड़क पर बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइट बंद मिलने के बाद ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने सख्त कार्रवाई की है। स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव में कथित लापरवाही के मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) एच.वी. रमेश को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट मिनिस्टर कृष्णा बायरे गौड़ा के निरीक्षण के बाद की गई।
मामला शहर के हडसन सर्कल से चालुक्य सर्कल तक के महत्वपूर्ण मार्ग से जुड़ा है। 28 अगस्त को मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने इस मार्ग का निरीक्षण किया था। इस दौरान सामने आया कि यहां लगी कुल 222 स्ट्रीट लाइटों में से 140 काम नहीं कर रही थीं। यानी आधे से अधिक स्ट्रीट लाइट बंद पाई गईं।
शहर के प्रमुख मार्ग पर इतनी बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइट खराब मिलने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। इसके बाद संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
222 में से सिर्फ 82 लाइट चालू
निरीक्षण के दौरान सामने आए आंकड़े शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं। हडसन सर्कल से चालुक्य सर्कल तक कुल 222 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। इनमें से केवल 82 लाइटें काम कर रही थीं जबकि 140 बंद मिलीं।
यह मार्ग बेंगलुरु के महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ता है और यहां रात के समय भी वाहनों तथा लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय माना गया।
स्ट्रीट लाइटों का नियमित रखरखाव संबंधित नगर निकाय और उसके इलेक्ट्रिकल विभाग की जिम्मेदारी होती है। खराब लाइटों की पहचान कर समय पर उनकी मरम्मत कराना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
मंत्री के निरीक्षण के बाद कार्रवाई
ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट मिनिस्टर कृष्णा बायरे गौड़ा ने 28 अगस्त को शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इसी दौरान स्ट्रीट लाइटों की खराब स्थिति उनके सामने आई।
जब एक ही मार्ग पर 140 लाइट बंद होने की जानकारी सामने आई तो रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। इसके बाद अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
GBA ने मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर इलेक्ट्रिकल एच.वी. रमेश के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
रखरखाव में लापरवाही का आरोप
एच.वी. रमेश पर स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव में कथित लापरवाही बरतने का आरोप है। प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लाइटों का बंद होना नियमित निगरानी और रखरखाव व्यवस्था में कमी की ओर संकेत करता है।
हालांकि निलंबन एक प्रशासनिक कार्रवाई है और इससे आरोप स्वतः सिद्ध नहीं होते। मामले में विभागीय प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जा सकता है और परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा सकती है।
जांच में यह देखा जा सकता है कि खराब स्ट्रीट लाइटों की सूचना संबंधित विभाग को कब मिली थी और उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
रात में सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा
स्ट्रीट लाइटों का काम केवल सड़कों को रोशन करना नहीं है। शहरी इलाकों में यह सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है।
अंधेरी सड़क पर वाहन चालकों को पैदल यात्रियों, गड्ढों, सड़क के अवरोधों और अन्य वाहनों को देखने में परेशानी हो सकती है। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा पैदल यात्रियों खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और देर रात काम से लौटने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी जरूरी मानी जाती है। मुख्य मार्गों पर स्ट्रीट लाइट बंद रहने से लोगों में असुरक्षा की भावना भी पैदा हो सकती है।
अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर
बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर में नागरिक सुविधाओं के बेहतर संचालन के लिए अधिकारियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण है। शहर में सड़क, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, जल निकासी और यातायात जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन लाखों लोग निर्भर रहते हैं।
ऐसे में किसी प्रमुख सड़क पर आधे से अधिक स्ट्रीट लाइटों का खराब होना प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाता है।
GBA की कार्रवाई को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि रखरखाव से जुड़े अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करनी होगी।
खराब लाइटों की समय पर मरम्मत जरूरी
शहर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। नियमित निरीक्षण और खराब लाइटों की पहचान के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत होती है।
यदि किसी इलाके में स्ट्रीट लाइट खराब होती है तो उसकी सूचना संबंधित विभाग तक जल्द पहुंचनी चाहिए। इसके बाद मरम्मत टीम को निर्धारित समय में समस्या दूर करनी चाहिए।
हडसन सर्कल से चालुक्य सर्कल के बीच 140 लाइटों का बंद मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि निगरानी प्रणाली को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
शहर की बुनियादी सुविधाओं पर नजर
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के सामने तेजी से बढ़ते शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। बेंगलुरु में यातायात और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी रहती हैं।
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी इन्हीं महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं में शामिल है। मुख्य सड़कों के साथ आवासीय क्षेत्रों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करना जरूरी है।
इस कार्रवाई से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी संदेश गया है कि नागरिक सुविधाओं के रखरखाव में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जा सकती है।
विभागीय जांच में सामने आएगी पूरी स्थिति
अब मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसमें यह पता लगाया जा सकता है कि इतनी बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें कब से खराब थीं और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी।
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि खराब लाइटों की मरम्मत के लिए पहले कोई शिकायत या निर्देश जारी किया गया था या नहीं। यदि शिकायतें मिली थीं तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
फिलहाल GBA ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एच.वी. रमेश को निलंबित कर स्ट्रीट लाइट रखरखाव में कथित लापरवाही पर सख्त रुख दिखाया है। 222 में से 140 स्ट्रीट लाइट बंद मिलने का मामला बेंगलुरु में नागरिक सुविधाओं की नियमित निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर सामने लाया है।