बेंगलुरु। कर्नाटक में एशियाई विकास बैंक (ADB) की आर्थिक मदद से संचालित स्कूलों की गुणवत्ता और छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार के लिए स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने नए परफॉर्मेंस टारगेट तय किए हैं। विभाग ने वर्ष 2030 तक हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के लिए नौ ‘डिमांड लेवल इंडिकेटर्स’ (DLIs) तैयार किए हैं। इन संकेतकों के आधार पर स्कूलों की प्रगति की निगरानी की जाएगी।

इस पूरी व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रत्येक इंडिकेटर से संबंधित प्रगति की निगरानी की जिम्मेदारी नोडल अधिकारियों को सौंपी गई है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एशियाई विकास बैंक से मिलने वाली आर्थिक सहायता के साथ स्कूलों में किए जा रहे सुधारों का असर निर्धारित समय के भीतर दिखाई दे।

एशियाई विकास बैंक ने कर्नाटक में कर्नाटक पब्लिक स्कूल (KPS) योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 1,750 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल स्कूलों से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए किया जाना है। अब विभाग ने आर्थिक सहायता के साथ स्पष्ट प्रदर्शन लक्ष्य भी तय कर दिए हैं।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से निर्धारित परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स में छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक कर्नाटक पब्लिक स्कूल संस्थानों में पढ़ने वाले कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार का लक्ष्य रखा गया है।

विभाग के अनुसार, कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों के भाषा यानी अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों में स्कोर को बेसलाइन की तुलना में कम से कम तीन प्रतिशत बढ़ाना होगा। यानी योजना के तहत केवल स्कूलों की सुविधाओं या व्यवस्थाओं पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को भी सुधार का प्रमुख आधार बनाया गया है।

इन चार प्रमुख विषयों में छात्रों की उपलब्धियों को निर्धारित आधार से मापा जाएगा। इसके बाद आने वाले वर्षों में उनकी प्रगति का आकलन किया जाएगा। वर्ष 2030 तक इन विषयों में कम से कम तीन प्रतिशत की वृद्धि हासिल करना निर्धारित लक्ष्यों में शामिल है।

विभाग ने कुल नौ DLIs बनाए हैं। इनका उद्देश्य योजना के तहत होने वाली प्रगति को अलग-अलग स्तर पर मापना है। प्रत्येक संकेतक से जुड़े काम और उपलब्धियों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इससे विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि कौन से लक्ष्य निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त काम की जरूरत है।

नोडल अधिकारियों की नियुक्ति से निगरानी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग संकेतकों की जिम्मेदारी तय होने से संबंधित अधिकारी नियमित रूप से प्रगति का आकलन कर सकेंगे। इससे वर्ष 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में स्कूलों के प्रदर्शन की लगातार समीक्षा संभव होगी।

कर्नाटक पब्लिक स्कूल योजना राज्य में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ADB की ओर से 1,750 करोड़ रुपये के ऋण की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना के क्रियान्वयन को और मजबूत करने की तैयारी की गई है। बड़ी आर्थिक सहायता के साथ विभाग ने परिणाम आधारित निगरानी पर भी जोर दिया है।

परफॉर्मेंस टारगेट तय किए जाने से स्कूलों के सामने अब स्पष्ट लक्ष्य रहेंगे। विभाग केवल धन के इस्तेमाल की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि योजना का वास्तविक प्रभाव विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर कितना पड़ रहा है।

कक्षा आठवीं को प्रदर्शन के आकलन में शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। इस स्तर पर विद्यार्थियों की भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की समझ आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। ऐसे में इन विषयों में स्कोर बढ़ाने का लक्ष्य छात्रों के सीखने के स्तर को मजबूत करने से जुड़ा है।

अंग्रेजी में विद्यार्थियों की भाषा संबंधी क्षमता, गणित में उनकी अवधारणात्मक समझ, विज्ञान में विषय से जुड़ी जानकारी और सामाजिक विज्ञान में प्रदर्शन को बेसलाइन से जोड़कर देखा जाएगा। वर्ष 2030 तक इन सभी विषयों में कम से कम तीन प्रतिशत सुधार हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत प्रगति को केवल अंतिम वर्ष में नहीं देखा जाएगा। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति से अलग-अलग चरणों में निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। इससे समय रहते कमियों की पहचान करने और जरूरत के अनुसार सुधार करने में मदद मिल सकती है।

ADB से मिलने वाली आर्थिक मदद को कर्नाटक पब्लिक स्कूल योजना के बेहतर क्रियान्वयन से जोड़ा गया है। ऐसे में विभाग द्वारा बनाए गए नौ DLIs योजना की प्रगति मापने के प्रमुख आधार होंगे। इन संकेतकों के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि निर्धारित उद्देश्यों के मुकाबले वास्तविक उपलब्धि कितनी है।

स्कूलों के लिए लक्ष्य तय करने का उद्देश्य जवाबदेही बढ़ाना भी है। किसी भी बड़े शैक्षणिक कार्यक्रम में आर्थिक निवेश के साथ उसके परिणामों का आकलन महत्वपूर्ण होता है। इसी दिशा में विभाग ने वर्ष 2030 तक की समयसीमा तय करते हुए प्रदर्शन संकेतक तैयार किए हैं।

कर्नाटक पब्लिक स्कूल संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पहल आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि निर्धारित लक्ष्य हासिल होते हैं तो इसका सीधा असर छात्रों के सीखने के स्तर पर दिखाई देगा। विशेष रूप से कक्षा आठवीं के चार प्रमुख विषयों में प्रदर्शन सुधार को स्पष्ट रूप से मापने योग्य लक्ष्य बनाया गया है।

1,750 करोड़ रुपये के ADB ऋण के साथ राज्य सरकार के सामने इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। इसी वजह से विभाग ने अलग-अलग संकेतकों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है।

विभाग अब नौ DLIs के आधार पर स्कूलों की प्रगति पर नजर रखेगा। प्रत्येक संकेतक से जुड़े नोडल अधिकारी अपने संबंधित क्षेत्र में लक्ष्य की दिशा में हो रहे काम की निगरानी करेंगे। इससे योजना के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं और कमियों को समय रहते पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने वर्ष 2030 को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। इसमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों को प्रमुखता दी गई है। कक्षा आठवीं के छात्रों के अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के स्कोर में बेसलाइन से कम से कम तीन प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य इस पूरी योजना के महत्वपूर्ण परिणामों में शामिल है।

अब आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि ADB की 1,750 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और विभाग की निगरानी व्यवस्था कर्नाटक पब्लिक स्कूलों में किस तरह बदलाव लाती है और वर्ष 2030 तक निर्धारित नौ संकेतकों पर स्कूल कितना प्रदर्शन कर पाते हैं।

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