बेंगलुरु। कर्नाटक में NICE प्रोजेक्ट को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इसी विवाद के बीच कुमारस्वामी ने केंगेरी के पास बी.एम. कैवेल इलाके का दौरा किया और 200 एकड़ से अधिक उस जमीन का मुआयना किया, जिसे उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ा बताया है। कुमारस्वामी ने अपने दौरे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा की।

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि NICE प्रोजेक्ट के लिए छोटे किसानों की एक-दो एकड़ तक जमीन चली गई, जबकि बी.एम. कैवेल में एक ही परिवार से जुड़ी 200 एकड़ से ज्यादा जमीन मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि यह जमीन मौजूदा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी हुई है। हालांकि जमीन के स्वामित्व और कथित अनियमितताओं को लेकर उनके आरोप विवादित हैं और शिवकुमार इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं।

बी.एम. कैवेल पहुंचने के बाद कुमारस्वामी ने वहां मौजूद जमीन का निरीक्षण किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छोटे किसानों की जमीन परियोजना के लिए ली गई तो प्रभावशाली लोगों से जुड़ी जमीनों के मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने इसे गरीब किसानों के साथ कथित भेदभाव से जोड़ते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।

कुमारस्वामी ने NICE कंपनी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कंपनी सिद्धगंगा मठ और गरीब किसानों को NOC नहीं देती, जबकि प्रभावशाली लोगों के लिए इसे हासिल करना आसान हो जाता है। ये आरोप कुमारस्वामी के हैं; NICE की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर प्रतिक्रिया इस उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्पष्ट नहीं है।

NICE यानी नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज से जुड़े बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर पिछले कुछ दिनों से कुमारस्वामी और शिवकुमार आमने-सामने हैं। कुमारस्वामी ने इससे पहले भी दस्तावेजों का हवाला देते हुए परियोजना में कथित अनियमितताओं और भूमि से जुड़े लेनदेन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि परियोजना के स्वरूप और जमीन से जुड़े फैसलों से शिवकुमार परिवार को फायदा पहुंचा।

कुमारस्वामी ने इससे पहले दावा किया था कि कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड यानी KIADB द्वारा BMIC परियोजना के लिए अधिग्रहित या अधिसूचित जमीन के कुछ हिस्सों को बाद में शिवकुमार परिवार से जुड़े लोगों ने खरीदा। उन्होंने डी.के. शिवकुमार के साथ उनके भाई डी.के. सुरेश और परिवार के अन्य सदस्यों का नाम भी अपने आरोपों में लिया है। इन दावों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार नहीं किया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कुमारस्वामी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी और उनके परिवार की संपत्तियां वैध तरीके से अर्जित की गई हैं और संबंधित विवरण आयकर विभाग तथा चुनावी हलफनामों में घोषित किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि कानूनी तरीके से संपत्ति रखने में गलत क्या है। शिवकुमार ने कुमारस्वामी के आरोपों को निराधार बताते हुए चुनौती दी है कि अगर उनके पास दस्तावेज हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाए।

इस जवाब के बावजूद कुमारस्वामी ने अपना हमला जारी रखा है। बी.एम. कैवेल का उनका दौरा इसी राजनीतिक विवाद की अगली कड़ी के रूप में सामने आया है। उन्होंने जमीन का निरीक्षण करने के बाद एक बार फिर गरीब किसानों और प्रभावशाली लोगों के साथ कथित तौर पर अलग-अलग व्यवहार किए जाने का मुद्दा उठाया।

कुमारस्वामी का कहना है कि NICE परियोजना से जुड़े भूमि मामलों की पूरी जांच होनी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि अधिग्रहण तथा जमीन के इस्तेमाल में किन लोगों को लाभ मिला। दूसरी तरफ शिवकुमार का पक्ष है कि उनकी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों में कोई गैरकानूनी बात नहीं है और उनकी संपत्ति का विवरण संबंधित संस्थाओं के सामने घोषित है।

NICE विवाद अब केवल परियोजना की जमीन तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों नेताओं के बीच पुराने फैसलों और अलग-अलग सरकारों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिवकुमार ने पलटवार करते हुए सवाल किया है कि अगर परियोजना में गंभीर अनियमितताएं थीं तो कुमारस्वामी ने पहले इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से संबंधित मुद्दों को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए।

वहीं कुमारस्वामी का दावा है कि उनके आरोप दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड पर आधारित हैं। उन्होंने परियोजना से जुड़े पुराने समझौतों, जमीन के अधिग्रहण और बाद में हुए कथित बदलावों को लेकर कई सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर कर्नाटक सरकार के मंत्रियों ने भी कुमारस्वामी के आरोपों का विरोध किया है और कहा है कि यदि उनके पास गैरकानूनी गतिविधियों के प्रमाण हैं तो उन्हें सक्षम अधिकारियों या अदालत के सामने पेश करना चाहिए।

बी.एम. कैवेल में 200 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर सामने आया ताजा दावा इसी व्यापक विवाद का हिस्सा है। कुमारस्वामी ने इसे किसानों के हितों से जोड़ते हुए कहा है कि छोटी जोत वाले किसानों की जमीन परियोजना में चली गई, जबकि प्रभावशाली परिवारों से जुड़ी बड़ी जमीनों को लेकर सवाल बने हुए हैं।

इस मामले में जमीन के वास्तविक स्वामित्व, अधिग्रहण प्रक्रिया और किसी कानूनी अनियमितता का अंतिम निर्धारण सक्षम सरकारी एजेंसियों या न्यायिक प्रक्रिया से ही हो सकता है। फिलहाल कुमारस्वामी के दावे राजनीतिक आरोप हैं, जबकि शिवकुमार ने उन्हें स्पष्ट रूप से नकार दिया है।

NICE परियोजना को लेकर दोनों नेताओं के बीच जारी टकराव में बी.एम. कैवेल का यह दौरा नया घटनाक्रम बन गया है। कुमारस्वामी ने जमीन का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर अपने आरोप दोहराए हैं, जबकि मुख्यमंत्री शिवकुमार पहले ही अपनी संपत्तियों और लेनदेन को वैध बताते हुए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में NICE जमीन विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और दस्तावेजों को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।

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