रिजिजू की टिप्पणी पर भड़के डीके शिवकुमार बोले पहले केंद्र अपना रिकॉर्ड देखे

Update: 2026-08-08 15:34 GMT
बेंगलुरु : कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को शामिल नहीं किए जाने पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पलटवार किया है। शिवकुमार ने कहा कि महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कर्नाटक को नसीहत देने से पहले केंद्र सरकार को अपने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने इस बहस को केवल कर्नाटक सरकार तक सीमित रखने के बजाय व्यापक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में देखने की जरूरत बताई।
हाल ही में कर्नाटक में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था। इस विस्तार में कुल 19 मंत्रियों को शामिल किया गया, लेकिन इनमें एक भी महिला को स्थान नहीं मिला। इसके बाद महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इसी को लेकर सवाल उठाया था। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने केंद्र के महिला प्रतिनिधित्व के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए और कहा कि इस विषय पर केवल राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
शिवकुमार की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा चल रही है। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के सामने कई राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की चुनौती थी। कई दावेदारों को मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी। हालांकि अंतिम सूची में किसी महिला विधायक को जगह नहीं मिलने से महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस लगातार महिला सशक्तीकरण और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल में किसी महिला को शामिल नहीं किया जाना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। कांग्रेस विधायक नयना मोटम्मा ने भी मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर निराशा जाहिर की है। इससे साफ है कि यह मुद्दा केवल विपक्ष की आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर से भी इस पर आवाज उठ रही है।
मंत्रिमंडल में महिला प्रतिनिधित्व की कमी को लेकर भाजपा अब कांग्रेस सरकार पर निशाना साधने की तैयारी में है। भाजपा इस मुद्दे को महिला सशक्तीकरण के दावों से जोड़कर सरकार को घेर सकती है। दूसरी ओर, डीके शिवकुमार के पलटवार ने राजनीतिक बहस का दायरा कर्नाटक से आगे बढ़ाकर केंद्र सरकार और उसके रिकॉर्ड तक पहुंचा दिया है।
दरअसल, मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी का सवाल भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। राजनीतिक दल महिला आरक्षण और महिला सशक्तीकरण की बात करते रहे हैं, लेकिन सरकारों और मंत्रिमंडलों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कर्नाटक में हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर इस बहस को राजनीतिक मंच पर ला दिया है।
डीके शिवकुमार ने संकेत दिया है कि महिला प्रतिनिधित्व को लेकर केवल कर्नाटक सरकार से सवाल करना पर्याप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि केंद्र और राज्यों दोनों के राजनीतिक रिकॉर्ड को समान नजरिए से देखा जाना चाहिए। इससे भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
वहीं, कांग्रेस के भीतर महिला विधायकों की नाराजगी भी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है। मंत्रिमंडल में महिलाओं को जगह नहीं मिलने के कारण पार्टी को अपने महिला सशक्तीकरण के राजनीतिक संदेश को लेकर सफाई देनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ भाजपा इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहस में कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है।
फिलहाल कर्नाटक मंत्रिमंडल में महिला प्रतिनिधित्व का सवाल राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। एक तरफ विपक्ष कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ डीके शिवकुमार केंद्र के रिकॉर्ड की ओर ध्यान दिलाकर भाजपा पर पलटवार कर रहे हैं। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है।
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