पुजारियों से डीके शिवकुमार की अपील, बोले- मंदिर की तरह सरकार की भी करें रक्षा
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुजराई विभाग के अंतर्गत आने वाले मंदिरों के पुजारियों से राज्य सरकार के समर्थन में सहयोग करने की अपील की है। बेंगलुरु में आयोजित एक राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पुजारी मंदिरों की देखभाल और सुरक्षा करते हैं, उसी भावना के साथ उन्हें सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में मदद करनी चाहिए।
‘कर्नाटक राज्य मुजराई मंदिर पुजारी और कर्मचारी संघ’ की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन और मंत्री रामलिंगा रेड्डी के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने पुजारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पुजारी समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उनकी बातों का लोगों पर प्रभाव पड़ता है।
डीके शिवकुमार ने कहा कि मंदिरों के पुजारियों को समाज में सम्मान प्राप्त है और लोग उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने वादों को पूरा करने का प्रयास किया है और जनता का भरोसा हासिल किया है। इसलिए पुजारियों को भी सरकार के कामों और योजनाओं के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने अपने वादे पूरे किए हैं। हमने आपका भरोसा जीता है। इसलिए, आपको इस सरकार की रक्षा वैसे ही करनी चाहिए जैसे आप अपने घर और मंदिर की रक्षा करते हैं।” उन्होंने पुजारियों से सरकार के प्रति विश्वास बनाए रखने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रामलिंगा रेड्डी ने विभाग के माध्यम से पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री ने अपने काम से पुजारियों का विश्वास हासिल किया है।
मुजराई विभाग कर्नाटक के मंदिरों के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। इसके अंतर्गत आने वाले मंदिरों में पूजा व्यवस्था, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे और अन्य प्रशासनिक कार्यों की देखरेख की जाती है। राज्य में बड़ी संख्या में मंदिर इस विभाग के अधीन आते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मंदिरों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रही है। उन्होंने पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।
सम्मेलन में मंदिर पुजारियों और कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसमें उनकी सुविधाओं, सम्मान, प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों को लेकर विचार रखे गए। कार्यक्रम में राज्यभर से आए पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्नाटक में चुनावी माहौल के बीच विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मंदिरों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े लोगों का समाज में प्रभाव होने के कारण राजनीतिक दल अक्सर उनके साथ संवाद करते हैं।
विपक्षी दलों की ओर से इस तरह की अपीलों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री का बयान सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को धार्मिक समुदायों तक पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
डीके शिवकुमार ने अपने संबोधन में सरकार की नीतियों और कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर कई फैसले लिए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार को जनता का समर्थन आगे भी मिलता रहेगा।
वहीं, मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने भी मुजराई विभाग के तहत किए जा रहे कार्यों और मंदिरों से जुड़े कर्मचारियों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार मंदिर व्यवस्था को बेहतर बनाने और इससे जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
कुल मिलाकर, बेंगलुरु में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पुजारियों की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करते हुए उनसे सरकार के साथ सहयोग की अपील की। उनके बयान ने धार्मिक संस्थानों, सामाजिक प्रभाव और राजनीति के बीच संबंधों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।