धारवाड़ में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी सबसे ज्यादा, कर्नाटक में 12.28 लाख मामले
बेंगलुरु। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत किए गए सर्वे में कर्नाटक में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, धारवाड़ जिले में असुरक्षित यानी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का अनुपात सबसे अधिक पाया गया है। यहां स्क्रीनिंग करवाने वाली हर तीन में से लगभग दो गर्भवती महिलाओं में जटिल गर्भावस्था की स्थिति सामने आई।
शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में गर्भवती महिलाओं की जांच के दौरान हाई-रिस्क मामलों की संख्या सामने आई है। इनमें बेलगाम जिले में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या के अनुपात में चिक्काबल्लापुर और कोलार जिलों में भी जोखिम वाली गर्भावस्थाओं का प्रतिशत अधिक रहा।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शिवमोगा के सांसद बी.वाई. राघवेंद्र के एक सवाल के जवाब में ये आंकड़े लोकसभा में प्रस्तुत किए। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत कर्नाटक में अब तक 35.13 लाख एंटीनेटल केयर (ANC) रजिस्ट्रेशन किए गए हैं।
इन पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में से 12.28 लाख महिलाओं की गर्भावस्था को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया। यह संख्या स्क्रीनिंग करवाने वाली कुल महिलाओं का लगभग 35 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि राज्य में प्रसव-पूर्व जांच कराने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं को अतिरिक्त चिकित्सा निगरानी और देखभाल की जरूरत पाई गई।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत हर महीने की 9 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है, ताकि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान की जा सके।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं, जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गंभीर एनीमिया, पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां या गर्भावस्था के दौरान होने वाली अन्य जटिलताएं। ऐसी महिलाओं को सामान्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में अधिक निगरानी और विशेष चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता होती है।
आंकड़ों के अनुसार, धारवाड़ में हाई-रिस्क मामलों का अनुपात चिंता का विषय बना हुआ है। जिले में जांच कराने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं में जोखिम वाली गर्भावस्था मिलने से स्वास्थ्य विभाग के सामने बेहतर निगरानी और उपचार व्यवस्था मजबूत करने की चुनौती है।
वहीं, बेलगाम में कुल हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की संख्या सबसे अधिक रही। अधिकारियों के अनुसार, अधिक आबादी और बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग होने के कारण भी कुछ जिलों में कुल मामलों की संख्या ज्यादा हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और समय पर इलाज से कई जटिलताओं को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाएं इसी उद्देश्य से शुरू की गई हैं, ताकि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कर्नाटक में स्वास्थ्य विभाग हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान के बाद उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने का काम कर रहा है। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह, नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने जैसी सेवाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने, समय पर एंटीनेटल जांच कराने और पोषण संबंधी सुविधाओं को मजबूत करने से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है।
कर्नाटक में सामने आए ये आंकड़े मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए अब चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जोखिम वाली सभी गर्भवती महिलाओं तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंच सके, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।