
मंगलुरु। कर्नाटक के मंगलुरु में वर्ष 2018 में हुए चर्चित थोटा बेंग्रे बीच गैंगरेप मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मंगलुरु की दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र (विशेष) अदालत ने मामले में दोषी पाए गए चारों आरोपियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपियों पर अलग-अलग धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया है।
करीब आठ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जताई गई है।
मामला 18 नवंबर 2018 का है, जब एक महिला अपने पुरुष मित्र के साथ मंगलुरु के पनामबूर इलाके के पास स्थित थोटा बेंग्रे बीच पर गई थी। आरोप है कि इसी दौरान थोटा बेंग्रे इलाके के रहने वाले कुछ लोगों ने महिला और उसके मित्र को निशाना बनाया।
पुलिस जांच के अनुसार, पेशे से मछुआरे चार वयस्क आरोपियों और तीन नाबालिगों ने महिला के पुरुष मित्र के साथ मारपीट की। इसके बाद आरोपियों ने महिला को एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
मामले में दोषी ठहराए गए चार वयस्क आरोपियों की पहचान प्रज्वल (33), अरुण अमीन (34), आदित्य सालियन (28) और अब्दुल रियाज (40) के रूप में हुई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इन्हें दोषी माना।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य रखे। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए और मामले की जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत में लंबी सुनवाई चली।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें 20-20 साल की कठोर सजा सुनाई। इसके अलावा अलग-अलग अपराधों के लिए आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
पीड़िता ने घटना के बाद आरोपियों पर धमकी देने का भी आरोप लगाया था। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उसे चेतावनी दी थी कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस मामले ने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी और पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की थी। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
महिला अपराधों से जुड़े मामलों में अदालतों द्वारा समय पर फैसले दिए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इस मामले में लगभग आठ साल बाद फैसला आने के बाद न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ितों को न्याय दिलाने की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हुई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दोषियों को सजा मिलने से समाज में अपराध के खिलाफ कड़ा संदेश जाता है। साथ ही, पीड़ितों को न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।
मंगलुरु पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले की जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। अदालत के फैसले के बाद अब दोषियों को तय सजा भुगतनी होगी।
थोटा बेंग्रे गैंगरेप मामला कर्नाटक में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मामलों में शामिल रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार को राहत मिली है।
फैसले के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से उम्मीद जताई गई है कि न्याय प्रक्रिया के माध्यम से अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है और पीड़ितों को न्याय मिल सकता है।





