श्रृंगेरी मार्ग से प्रस्तावित शिवमोग्गा–मंगलुरु रेलवे प्रोजेक्ट पर विवाद, ‘Save Sringeri’ अभियान शुरू
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में प्रस्तावित शिवमोग्गा–मंगलुरु रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। यह प्रस्तावित रेल मार्ग वेस्टर्न घाट से होकर श्रृंगेरी क्षेत्र को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव को लेकर विरोध भी तेज हो गया है।
पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए चिकमंगलुरु जिले के कुछ लोगों ने इस परियोजना के खिलाफ ऑनलाइन कैंपेन ‘Save Sringeri’ शुरू किया है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि मलनाड क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय लोगों के जीवन की कीमत पर इस तरह के रेलवे नेटवर्क की आवश्यकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।
अभियान समर्थकों का तर्क है कि वेस्टर्न घाट जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र से होकर रेलवे लाइन बिछाने से जंगल, जैव विविधता और स्थानीय जल स्रोतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस परियोजना के कारण स्थानीय समुदायों और किसानों के जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
पर्यावरणविद् नागराज कूव ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता पहले मलनाड क्षेत्र के छोटे किसानों को भूमि अधिकार (टाइटल डीड) देना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग अब भी बेघर हैं और उन्हें पहले आवास उपलब्ध कराना जरूरी है।
नागराज कूव ने आगे कहा कि विकास परियोजनाओं पर चर्चा करने से पहले स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “बहुत से लोग बेघर हैं। अब समय आ गया है कि उन्हें घर दिए जाएं। बाद में, सरकार मलनाड और कोस्टल इलाके के बीच रेलवे लाइन बनाने के बारे में सोच सकती है।”
वहीं, श्रृंगेरी सुपारी उगाने वालों के एसोसिएशन के महासचिव अरविंद सिगदल ने भी इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं, वे अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि इससे स्थानीय लोगों को क्या वास्तविक लाभ मिलेगा और इसकी आवश्यकता क्यों है।
उनका कहना है कि बिना स्थानीय समुदाय की सहमति और स्पष्ट लाभ के किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
इस पूरे विवाद के बीच क्षेत्र में विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां रेलवे परियोजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता इसे पारिस्थितिकी के लिए खतरा मान रहे हैं।
फिलहाल ‘Save Sringeri’ अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और कई लोग इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। आने वाले समय में यह परियोजना राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बनने की संभावना है।