बेंगलुरु। कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) से अपील की है कि तमिलनाडु के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को तुरंत कम किया जाए। कर्नाटक ने मौजूदा 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के निर्देश को घटाकर 6,000 क्यूसेक प्रतिदिन करने की मांग की है।

कर्नाटक के अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) गौरव गुप्ता ने मंगलवार को CWMA के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने प्राधिकरण से 11 अगस्त को हुई 55वीं बैठक में लिए गए फैसले की तत्काल समीक्षा करने का अनुरोध किया। कर्नाटक सरकार का कहना है कि वर्तमान जल स्थिति को देखते हुए तमिलनाडु को छोड़े जा रहे पानी की मात्रा पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

कर्नाटक का तर्क है कि राज्य में जलाशयों की स्थिति, बारिश की स्थिति और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ने के फैसले की समीक्षा जरूरी है। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अधिक मात्रा में पानी छोड़ने से कर्नाटक के किसानों और पेयजल जरूरतों पर असर पड़ सकता है।

कावेरी नदी जल बंटवारा लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है। दोनों राज्य कावेरी नदी के पानी पर अपनी-अपनी जरूरतों और अधिकारों को लेकर समय-समय पर आमने-सामने आते रहे हैं।

कर्नाटक सरकार ने CWMA के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि जल उपलब्धता और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर पानी छोड़ने की मात्रा तय की जानी चाहिए। राज्य का कहना है कि पिछले फैसले के समय जिन परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया था, उनमें अब बदलाव आया है।

वहीं, तमिलनाडु लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि कर्नाटक कावेरी जल समझौते और प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करे। तमिलनाडु के किसानों की बड़ी आबादी सिंचाई के लिए कावेरी नदी पर निर्भर है। ऐसे में पानी की आपूर्ति में कमी से फसलों पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती है।

CWMA कावेरी जल विवाद को लेकर केंद्र और दोनों राज्यों के बीच समन्वय का काम करता है। प्राधिकरण समय-समय पर जल उपलब्धता, बारिश और जलाशयों की स्थिति की समीक्षा कर राज्यों के लिए पानी छोड़ने संबंधी दिशा-निर्देश जारी करता है।

कर्नाटक के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में इस समय जल संसाधनों पर दबाव है। कई क्षेत्रों में किसानों और आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रखना जरूरी है। इसलिए तमिलनाडु को छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम करने की मांग की गई है।

जल विशेषज्ञों के अनुसार, कावेरी जैसी अंतरराज्यीय नदियों के पानी का बंटवारा हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। मानसून की स्थिति, जलाशयों में पानी का स्तर और कृषि जरूरतें इस विवाद को प्रभावित करती हैं। ऐसे मामलों में दोनों राज्यों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होती है।

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद कई दशकों पुराना है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न जल प्राधिकरणों के फैसलों के आधार पर पानी के बंटवारे की व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि, हर साल बारिश की स्थिति बदलने के कारण नए विवाद सामने आते रहते हैं।

फिलहाल कर्नाटक की मांग पर CWMA को विचार करना है। अगर प्राधिकरण पानी छोड़ने की मात्रा में बदलाव करता है तो इसका सीधा असर दोनों राज्यों के किसानों और जल प्रबंधन पर पड़ेगा।

कर्नाटक सरकार ने उम्मीद जताई है कि जल उपलब्धता और राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण उचित फैसला लेगा। वहीं, तमिलनाडु की नजर भी इस मामले में होने वाले अगले फैसले पर बनी हुई है।

कावेरी जल विवाद एक बार फिर चर्चा में आने के बाद दोनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं। आने वाले दिनों में CWMA की समीक्षा और निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।

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