बेंगलुरु। कर्नाटक की वित्तीय स्थिति को लेकर बुधवार को विपक्षी BJP ने राज्य सरकार के खिलाफ विधान सौधा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक स्थिति दबाव में है और इसका असर विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब राज्य के वित्त विभाग ने सरकार को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को देखते हुए नए और बड़े खर्च वाले प्रोजेक्ट शुरू करने में सावधानी बरतने की सलाह दी है। वित्त विभाग की टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे अपने नोट में कहा है कि उपलब्ध फंड को देखते हुए खर्च के मामले में व्यावहारिक रुख अपनाना उचित होगा और पहले से स्वीकृत लेकिन अधूरे कार्यों की लंबित लागत को और नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। विभाग की यह टिप्पणी एक प्रस्तावित ग्रामीण सड़क योजना की समीक्षा के दौरान सामने आई।

बड़े प्रोजेक्ट पर सावधानी की सलाह

वित्त विभाग की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विभाग ने नए बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले उसके लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का आकलन करने की जरूरत बताई है।

विभाग की सलाह का मुख्य बिंदु यह है कि ऐसे प्रोजेक्ट जिनके लिए बजट में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है, उन्हें शुरू करने से पहले फंडिंग का स्पष्ट स्रोत तय होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर सरकार के नकदी प्रवाह और पहले से चल रहे विकास कार्यों के भुगतान पर दबाव बढ़ सकता है।

ग्रामीण सड़क योजना के प्रस्ताव पर आया नोट

वित्त विभाग की यह टिप्पणी ग्रामीण सड़क संपर्क से जुड़े एक बड़े प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान सामने आई। प्रस्ताव पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे आने वाले वित्तीय वर्षों में लागू करने की योजना बनाई गई थी।

वित्त विभाग ने कहा कि सरकार के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए नई परियोजनाओं की लागत और पहले से लंबित कार्यों के खर्च के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। विभाग ने लंबित परियोजनाओं की लागत के बोझ में और बढ़ोतरी से बचने की सलाह दी।

विधान सौधा में BJP का विरोध

वित्त विभाग की टिप्पणी सामने आने के बाद भाजपा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया। बुधवार को पार्टी नेताओं ने विधान सौधा परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक पहले भी वित्त विभाग की टिप्पणी को लेकर सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार वित्तीय दबाव में है और पर्याप्त बजटीय प्रावधान के बिना बड़ी परियोजनाएं शुरू करना मुश्किल हो रहा है। ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; वित्त विभाग ने अपने नोट में खर्च में सावधानी की सलाह दी है, राज्य को औपचारिक रूप से दिवालिया घोषित नहीं किया है।

आर. अशोक ने उठाए सवाल

आर. अशोक ने वित्त विभाग की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को बिना बजटीय प्रावधान वाले बड़े प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले संसाधन जुटाने होंगे।

उन्होंने दावा किया कि राज्य अपनी उधारी क्षमता पर भी दबाव का सामना कर रहा है। अशोक ने इसे राज्य में 'वित्तीय सूखे' की स्थिति बताया। यह उनका राजनीतिक आकलन है।

उन्होंने सरकार के विभिन्न विभागों के लंबित भुगतान और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की वित्तीय स्थिति को लेकर भी आरोप लगाए हैं।

सरकार ने आरोपों का किया जवाब

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने वित्त विभाग की सलाह को सरकार के हित में दी गई सामान्य वित्तीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को पता है कि किन योजनाओं को जारी रखना है और किन नई योजनाओं को लागू करना है।

शिवकुमार ने सरकार की पांच गारंटी योजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि महंगाई और लोगों की आय पर पड़े दबाव को देखते हुए इन योजनाओं को लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और आम लोगों की आजीविका को सहारा देने के लिए काम कर रही है।

बजट में गारंटी योजनाओं के लिए बड़ा आवंटन

कर्नाटक सरकार के 2026-27 के बजट में पांच गारंटी योजनाओं को जारी रखने के लिए 51,286 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार के आधिकारिक बजट विवरण के मुताबिक फरवरी 2026 तक इन योजनाओं पर कुल 1,21,598 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।

सरकार का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं के साथ बुनियादी ढांचे पर निवेश भी जारी रखा गया है। 2026-27 के बजट में पूंजीगत परियोजनाओं के लिए 84,567 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसलिए वित्त विभाग की सावधानी संबंधी टिप्पणी को राज्य में सभी विकास कार्य बंद होने की आधिकारिक पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार ने केंद्र से भी मांगा बकाया फंड

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार से कर्नाटक को मिलने वाले फंड का मुद्दा भी उठाया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र को राज्य के लिए घोषित अनुदान जारी करना चाहिए। विशेष रूप से अपर भद्रा परियोजना के लिए घोषित 5,300 करोड़ रुपये का उल्लेख करते हुए उन्होंने केंद्र से यह राशि जारी करने की मांग की।

इस तरह राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर कांग्रेस सरकार और भाजपा दोनों अलग-अलग तर्क सामने रख रहे हैं।

उधारी क्षमता को लेकर भी चर्चा

वित्त विभाग की टिप्पणी के बाद राज्य की उधारी क्षमता भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। विपक्ष का दावा है कि राज्य सरकार पहले ही अपनी उधारी सीमा पर काफी दबाव डाल चुकी है और नई बड़ी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त कर्ज जुटाना आसान नहीं होगा।

वित्त विभाग ने भी उपलब्ध संसाधनों के अनुसार परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने और लंबित कार्यों की लागत को ध्यान में रखने की सलाह दी है।

हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि वह वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सामाजिक कल्याण और विकास दोनों को आगे बढ़ा रही है।

राज्य सरकार का आर्थिक विकास पर जोर

कर्नाटक सरकार ने 2026-27 के बजट में आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में राज्य की GSDP वृद्धि 8.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 7.4 प्रतिशत थी।

राज्य सरकार इन आंकड़ों का हवाला देते हुए अपनी आर्थिक स्थिति का बचाव करती रही है। दूसरी ओर विपक्ष वित्त विभाग की ताजा सलाह को खर्च और संसाधनों पर बढ़ते दबाव के संकेत के रूप में पेश कर रहा है।

सूखे के बीच वित्तीय मुद्दा भी गर्माया

कर्नाटक में इस समय गंभीर सूखे को लेकर विशेष विधायी सत्र भी चल रहा है। विपक्ष ने सूखा राहत और किसानों की समस्याओं के साथ राज्य की वित्तीय स्थिति को भी मुद्दा बनाया है।

आर. अशोक ने मंगलवार को विधानसभा में आरोप लगाया था कि सूखे से किसान परेशान हैं और इसी दौरान वित्त विभाग की टिप्पणी ने राज्य सरकार पर वित्तीय दबाव को उजागर किया है। उन्होंने सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी थी।

वित्तीय प्राथमिकताओं पर बढ़ी बहस

वित्त विभाग की सलाह के बाद अब सवाल यह है कि राज्य सरकार अपनी नई परियोजनाओं, पहले से चल रहे विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के बीच उपलब्ध संसाधनों का बंटवारा किस तरह करती है।

विभाग ने बड़े खर्च वाले प्रोजेक्ट को लेकर सावधानी बरतने और उपलब्ध फंड के अनुसार प्राथमिकताएं तय करने की सलाह दी है। विपक्ष इसे सरकार की वित्तीय नीतियों की आलोचना के आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वित्त विभाग की सलाह सामान्य वित्तीय अनुशासन का हिस्सा है।

बुधवार को विधान सौधा परिसर में भाजपा के प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा और राजनीतिक हो गया है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए फंड आवंटन और राज्य सरकार के अगले वित्तीय फैसलों से यह स्पष्ट होगा कि वित्त विभाग की सलाह का विकास योजनाओं पर कितना असर पड़ता है।

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