बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने ‘होममेकर’ यानी घर संभालने वाले व्यक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ‘होममेकर’ शब्द जेंडर न्यूट्रल है और इसका इस्तेमाल केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति परिवार की देखभाल करता है, घरेलू जिम्मेदारियां निभाता है या परिवार के लिए आर्थिक योगदान देता है, उसे भी होममेकर माना जा सकता है।

जस्टिस चिल्लाकुर सुमालथा ने पश्चिम बंगाल निवासी पम्पालाल की ओर से वर्ष 2018 में दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामले में मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश दिया और मोटर एक्सीडेंट कंपनसेशन ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा पहले दिए गए मुआवजे के अतिरिक्त 1.96 लाख रुपये और देने का निर्देश दिया।

मामला वर्ष 2013 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर 2013 को पम्पालाल अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज गति और लापरवाही से चलाई जा रही कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में पम्पालाल घायल हो गए थे।

दुर्घटना के बाद उन्होंने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2018 में उन्हें मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन पम्पालाल ने मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पीड़ित की स्थिति और परिवार में उनकी भूमिका को ध्यान में रखते हुए मुकर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा होममेकर शब्द जेंडर न्यूट्रल पुरुष और महिला दोनों के लिए इस्तेमाल योग्य

आवजे की समीक्षा की। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की घरेलू जिम्मेदारियों और परिवार के लिए किए जा रहे योगदान को आर्थिक मूल्य के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।

कोर्ट ने ‘होममेकर’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह किसी एक लिंग तक सीमित नहीं है। आमतौर पर समाज में यह धारणा रही है कि घर संभालने का काम महिलाओं से जुड़ा है, लेकिन वास्तविकता में पुरुष भी परिवार की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाते हैं।

अदालत ने कहा कि जो लोग नौकरी करते हैं, वेतन प्राप्त करते हैं या परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हैं, वे भी कई परिस्थितियों में होममेकर की भूमिका निभा सकते हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियां केवल बिना वेतन वाले घरेलू काम तक सीमित नहीं हैं।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी घरेलू कार्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को व्यापक नजरिए से देखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति के योगदान का मूल्यांकन केवल उसकी आय के आधार पर नहीं किया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में पीड़ित की आय, पारिवारिक भूमिका और भविष्य के नुकसान जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। कई बार घरेलू जिम्मेदारियां निभाने वाले व्यक्तियों के योगदान का सही आकलन करना चुनौतीपूर्ण होता है।

इस मामले में हाई कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए कहा कि पीड़ित के नुकसान का उचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अदालत के आदेश के बाद पम्पालाल को पहले दिए गए मुआवजे के अलावा अतिरिक्त 1.96 लाख रुपये मिलेंगे।

‘होममेकर’ शब्द को लेकर हाई कोर्ट की यह टिप्पणी सामाजिक बदलावों को भी दर्शाती है। आज के समय में परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले पुरुष और महिलाएं दोनों की भूमिकाएं बदल रही हैं। कई पुरुष घर की देखभाल करते हैं, जबकि कई महिलाएं आर्थिक रूप से परिवार का नेतृत्व करती हैं।

अदालत ने अपने आदेश में यह संदेश दिया कि घरेलू कार्य और पारिवारिक जिम्मेदारियां किसी एक लिंग से जुड़ी नहीं हैं। परिवार के लिए किया गया योगदान महत्वपूर्ण है और इसे कानूनी मामलों में भी उचित महत्व मिलना चाहिए।

कर्नाटक हाई कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है, जहां घरेलू जिम्मेदारियों और परिवार में किसी व्यक्ति की भूमिका का मूल्यांकन किया जाना हो।

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