रांची में जल संकट गहराया, 96 घंटे से 3 लाख लोगों के घरों में नहीं आया नल का पानी
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जल संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। शहर की करीब 3 लाख से अधिक आबादी पिछले 96 घंटे यानी चार दिनों से नल के पानी का इंतजार कर रही है। जरूरत भर पानी के लिए लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। नल से जलापूर्ति ठप होने के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर घर के कामकाज तक प्रभावित हो रहे हैं।
शहर के कई इलाकों में लोग सुबह से शाम तक पानी की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं। जिन परिवारों के पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, उन्हें बाजार से पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जहां छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग हैं।
जानकारी के अनुसार, रांची के रातू सिमलिया, इटकी, पंडरा रोड, पुंदाग, अरगोड़ा, हाउसिंग कॉलोनी, जगन्नाथपुर स्थित मौसीबाड़ी समेत कई इलाकों में पिछले कई दिनों से जलापूर्ति प्रभावित है। इसके अलावा शहर की कई मलिन बस्तियों में भी लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
नल पर निर्भर लोग परेशान
राजधानी के बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर हैं। नल से पानी नहीं आने के कारण लोगों को पीने के पानी के साथ-साथ नहाने, कपड़े धोने और खाना बनाने तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कुछ समय के अंतराल पर पानी की समस्या आती थी, लेकिन इस बार लगातार चार दिनों तक आपूर्ति बाधित रहने से स्थिति गंभीर हो गई है। लोगों को सुबह से ही पानी की तलाश में इधर-उधर जाना पड़ रहा है।
कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने मजबूरी में बाजार से पानी के जार और बोतल खरीदने शुरू कर दिए हैं। लेकिन हर दिन बड़ी मात्रा में पानी खरीदना आम लोगों के लिए आर्थिक बोझ भी बन रहा है।
रसोई और घरेलू काम प्रभावित
पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर घरों के दैनिक कामों पर पड़ा है। खाना बनाने, बर्तन साफ करने और अन्य घरेलू कार्यों में लोगों को काफी दिक्कत हो रही है।
गृहिणियों का कहना है कि सीमित पानी में घर चलाना मुश्किल हो गया है। पीने के पानी की व्यवस्था करने के बाद घरेलू कामों के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचता। कई लोगों ने बताया कि उन्हें पानी बचाकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
कई इलाकों में बढ़ी परेशानी
रातू सिमलिया, इटकी और पंडरा रोड जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने बताया कि जलापूर्ति बाधित होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। पुंदाग, अरगोड़ा और हाउसिंग कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भी लोग प्रभावित हैं।
जगन्नाथपुर के मौसीबाड़ी क्षेत्र और आसपास की बस्तियों में भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। इन क्षेत्रों में कई परिवारों के पास निजी बोरिंग या अन्य वैकल्पिक साधन नहीं हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
जलापूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल
चार दिनों तक शहर के बड़े हिस्से में पानी की आपूर्ति बाधित रहने के बाद जल प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि राजधानी जैसे शहर में इतने लंबे समय तक जलापूर्ति प्रभावित होना गंभीर समस्या है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि जल संकट के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था भी की जानी चाहिए, ताकि लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।
प्रशासन से राहत की उम्मीद
लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही जलापूर्ति व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। हालांकि अभी तक प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तरह राहत नहीं मिल सकी है। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
राजधानी रांची में लगातार चार दिनों से जारी जल संकट ने एक बार फिर शहर की जल प्रबंधन व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है। तीन लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने से साफ है कि जल्द स्थायी समाधान की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।