अमृतपुर। अमृतपुर गांव में भू-स्खलन के कारण सिंचाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति को बड़ा नुकसान पहुंचा है। भू-स्खलन की चपेट में आने से करीब 30 मीटर लंबी सिंचाई गूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बह गई। इसके कारण लगभग 50 नाली कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी पहुंचना प्रभावित हो गया है। वहीं गूल के ऊपर से हुए भू-स्खलन की वजह से पेयजल लाइन भी टूट गई है। एक साथ सिंचाई और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने से ग्रामीणों और किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

सिंचाई गूल के क्षतिग्रस्त होने के बाद खेतों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया है। किसानों को चिंता है कि यदि जल्द गूल की मरम्मत नहीं हुई तो समय पर सिंचाई नहीं हो पाएगी और इसका सीधा असर फसलों पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ पेयजल लाइन टूटने से गांव में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

30 मीटर हिस्से में गूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त

जानकारी के मुताबिक भू-स्खलन का मलबा आने और जमीन खिसकने से सिंचाई गूल का करीब 30 मीटर हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कई जगह गूल का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।

इस गूल के जरिए आसपास के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाता था। लेकिन अब पानी आगे नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसानों के सामने फसलों को समय पर पानी देने की चुनौती खड़ी हो गई है।

गूल को दोबारा चालू करने के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना आवश्यक होगा।

50 नाली कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित

गूल टूटने से लगभग 50 नाली कृषि भूमि प्रभावित बताई जा रही है। इस क्षेत्र के किसान सिंचाई के लिए काफी हद तक इसी व्यवस्था पर निर्भर हैं।

खेती में सही समय पर पानी मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि फसल के महत्वपूर्ण चरण में सिंचाई नहीं हो पाती तो पौधों की वृद्धि और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।

इसी कारण किसान गूल की जल्द से जल्द मरम्मत की मांग कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि मरम्मत में अधिक समय लगने पर उनकी मेहनत और खेती पर किया गया खर्च प्रभावित हो सकता है।

पेयजल लाइन भी भू-स्खलन की चपेट में

भू-स्खलन का असर केवल सिंचाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। गूल के ऊपर से गुजरने वाली पेयजल लाइन भी इसकी चपेट में आकर टूट गई।

पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। अब स्थानीय लोगों को पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ सकता है।

ग्रामीणों के लिए एक ही समय में खेतों की सिंचाई और घरों के लिए पीने के पानी की समस्या पैदा होना बड़ी परेशानी बन गया है।

किसानों को सताने लगी फसल की चिंता

सिंचाई व्यवस्था बाधित होने के बाद स्थानीय किसानों को अपनी फसलों की चिंता सताने लगी है। खेतों में खड़ी फसलों को निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त गूल की जल्द मरम्मत जरूरी है। यदि इसमें देरी होती है तो नुकसान का दायरा बढ़ सकता है।

खासकर उन खेतों के लिए समस्या अधिक गंभीर है जहां सिंचाई के लिए कोई दूसरा भरोसेमंद विकल्प उपलब्ध नहीं है।

गांव में दोहरा संकट

अमृतपुर के ग्रामीणों के सामने फिलहाल दोहरा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ खेतों तक पानी पहुंचाने वाली सिंचाई गूल टूट गई है और दूसरी तरफ पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त है।

खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जबकि पेयजल दैनिक जीवन की बुनियादी जरूरत है। दोनों व्यवस्थाओं का एक साथ प्रभावित होना ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या है।

ऐसे में स्थानीय स्तर पर तत्काल अस्थायी व्यवस्था करने के साथ स्थायी मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है।

जल्द मरम्मत की जरूरत

सिंचाई गूल के करीब 30 मीटर हिस्से को दोबारा तैयार करने के लिए मौके की स्थिति का तकनीकी आकलन जरूरी होगा। भू-स्खलन वाले क्षेत्र में केवल टूटी गूल की मरम्मत पर्याप्त नहीं हो सकती, क्योंकि दोबारा जमीन खिसकने का खतरा भी बना रह सकता है।

ऐसे में मरम्मत करते समय गूल को सुरक्षित बनाने और भविष्य में भू-स्खलन से बचाने के उपायों पर भी ध्यान देना होगा।

पेयजल लाइन को भी जल्द बहाल करना जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए परेशानी न उठानी पड़े।

भू-स्खलन वाले हिस्से की जांच जरूरी

जिस स्थान पर भू-स्खलन हुआ है, वहां जमीन की स्थिति का निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा। यदि पहाड़ी या ढलान से लगातार मलबा गिरने का खतरा है तो मरम्मत कार्य भी प्रभावित हो सकता है।

संबंधित विभाग को यह देखना होगा कि गूल और पाइपलाइन को पहले वाली जगह पर ही सुरक्षित रूप से बहाल किया जा सकता है या उनके रास्ते में किसी बदलाव की आवश्यकता है।

तकनीकी जांच के बाद ही स्थायी समाधान तैयार किया जा सकता है।

वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की मांग

पेयजल लाइन टूटने के बाद ग्रामीणों के लिए तत्काल पानी की व्यवस्था करना भी जरूरी हो गया है। स्थायी पाइपलाइन की मरम्मत में समय लगने की स्थिति में वैकल्पिक स्रोत से पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द कार्रवाई करेगा।

जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है परेशानी

फिलहाल अमृतपुर में करीब 30 मीटर सिंचाई गूल के बह जाने से 50 नाली कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित है। साथ ही पेयजल लाइन टूटने से ग्रामीणों की दैनिक जरूरतों पर भी असर पड़ा है।

यदि समय रहते दोनों व्यवस्थाएं बहाल नहीं की गईं तो किसानों की फसलों को नुकसान होने के साथ गांव में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है। ग्रामीणों की नजर अब संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है और वे सिंचाई गूल तथा पेयजल लाइन की जल्द मरम्मत की उम्मीद कर रहे हैं।

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