अंधविश्वास पड़ा भारी इलाज में देरी से दो भाइयों की गई जान
मलेरिया टाइफाइड से परिवार पर टूटा कहर
रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में अंधविश्वास के चलते एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तेज बुखार से पीड़ित दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि परिवार ने बीमारी को ‘ऊपरी हवा’ मानकर पहले झाड़-फूंक कराई, जिससे इलाज में देरी हुई।
घटना भदानीनगर ओपी क्षेत्र के पारगड़ा गांव की बताई जा रही है। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्य—15 वर्षीय रामकिसुन, 10 वर्षीय साहिल और उनकी मां संगीता देवी—बीमार पड़े थे। शुरुआत में परिजनों ने इसे सामान्य बुखार या किसी बाहरी प्रभाव की वजह मानकर डॉक्टर से संपर्क करने के बजाय तांत्रिक से झाड़-फूंक करानी शुरू कर दी।
तीन दिन तक चलता रहा झाड़-फूंक
परिजनों के अनुसार, जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में जाने के बाद परिवार को लगा कि उन पर ‘ऊपरी हवा’ का असर हो गया है। इसी सोच के चलते कई दिनों तक पूजा-पाठ और झाड़-फूंक कराई गई। इस दौरान तीनों की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। बाद में जांच में मलेरिया और टाइफाइड के लक्षण सामने आए। जब बच्चों की स्थिति गंभीर हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद दोनों भाइयों को अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। वहीं मां संगीता देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया है। दोनों भाइयों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार के मुखिया शंकर बेदिया घटना के समय बाहर काम कर रहे थे। घर लौटने पर उन्हें अपने दोनों बेटों की मौत और पत्नी की गंभीर हालत की जानकारी मिली।
गांव में स्वास्थ्य जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और लोगों की जांच शुरू की। ग्रामीणों के रक्त नमूने लिए गए हैं। साथ ही पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए पानी के सैंपल भी जुटाए गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेज बुखार या किसी भी गंभीर बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं और समय पर इलाज कराएं। यह घटना एक बार फिर बताती है कि बीमारी के समय झाड़-फूंक के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है।