रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में एक ही परिवार के दो नाबालिग बच्चों के बाद उनकी मां की भी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत होने से हड़कंप मच गया है। भदानीनगर क्षेत्र के पाली-सुद्दी पारगढ़ा गांव में हुई तीन मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया और परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। शुरुआती निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने तीनों की मौत के पीछे मलेरिया या टाइफाइड होने की संभावना कम बताई है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम में सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. अनिल कुमार, यक्ष्मा अधिकारी डॉ. स्वराज और डॉ. सत्यप्रकाश सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। टीम ने गांव में पहुंचकर उस स्थान का निरीक्षण किया जहां परिवार रहता था। साथ ही मौत से पहले तीनों की तबीयत और उनमें दिखाई दिए लक्षणों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई।

दो बच्चों के बाद मां ने भी तोड़ा दम

मामला पाली-सुद्दी पारगढ़ा गांव का है। यहां पहले परिवार के दो नाबालिग बच्चों की मौत हुई थी। बच्चों की मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाती, इससे पहले उनकी मां की भी मौत हो गई। एक ही परिवार में कुछ समय के भीतर तीन लोगों की मौत ने ग्रामीणों को चिंतित कर दिया।

तीनों की मौत की जानकारी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत किस वजह से हुई।

मौतों के कारण को लेकर गांव में तरह-तरह की आशंकाएं भी जताई जाने लगीं। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की वास्तविकता जानने और किसी संभावित बीमारी की पहचान के लिए जांच शुरू की।

मलेरिया और टाइफाइड की आशंका कम

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर परिस्थितियों का निरीक्षण करने और तीनों की तबीयत से संबंधित जानकारी जुटाने के बाद शुरुआती तौर पर मलेरिया और टाइफाइड की संभावना को कम बताया है।

अधिकारियों के मुताबिक मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों में आम तौर पर बुखार प्रमुख लक्षणों में शामिल होता है। लेकिन परिवार और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार तीनों मृतकों में बुखार जैसा कोई समान लक्षण सामने नहीं आया था।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार तीनों में अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई दिए थे। ऐसे में एक ही संक्रामक बीमारी को सीधे तीनों मौतों का कारण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। हालांकि मौत का वास्तविक कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

तीनों में थे अलग-अलग लक्षण

स्वास्थ्य विभाग के लिए यह तथ्य महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि तीनों मृतकों में बीमारी के लक्षण एक जैसे नहीं थे। यदि किसी संक्रामक बीमारी की वजह से एक ही परिवार के कई सदस्य प्रभावित होते हैं तो उनमें कुछ सामान्य लक्षण मिलने की संभावना रहती है। यहां प्रारंभिक जानकारी में ऐसा नहीं पाया गया।

यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग अब अन्य संभावित कारणों की ओर भी ध्यान दे रहा है। टीम ने घर और आसपास की परिस्थितियों का जायजा लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौतों के पीछे कोई पर्यावरणीय, खान-पान से जुड़ा या अन्य कारण तो नहीं था।

हालांकि इस स्तर पर किसी एक वजह को मौत का कारण घोषित नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।

गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

तीन मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम के गांव पहुंचने से ग्रामीणों को भी अपनी आशंकाओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने का मौका मिला। टीम ने स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेने के साथ स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं का निरीक्षण किया।

सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार सहित अन्य चिकित्सकों ने पूरे मामले की जानकारी ली। यक्ष्मा अधिकारी डॉ. स्वराज और डॉ. सत्यप्रकाश ने भी मौके पर स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की।

एक ही परिवार में तीन मौतों की घटना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग किसी संभावित बीमारी के प्रसार की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहता। इसी कारण गांव की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

वास्तविक कारण का पता लगाना चुनौती

तीनों की मौत के कारणों का पता लगाना अब स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण है। शुरुआती निरीक्षण में मलेरिया और टाइफाइड की संभावना कम होने के बाद अन्य कारणों की जांच जरूरी हो गई है। इसके लिए उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज से जुड़ी जानकारी और मौत से पहले दिखाई दिए लक्षणों का विश्लेषण किया जा सकता है।

यह भी देखा जाएगा कि तीनों ने मौत से पहले क्या खाया-पिया था, घर में किसी जहरीले पदार्थ के संपर्क में आने की आशंका थी या नहीं और आसपास ऐसी कोई परिस्थिति मौजूद थी या नहीं जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी।

जरूरत पड़ने पर पानी और खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच भी कारणों तक पहुंचने में मददगार हो सकती है। हालांकि आगे किस तरह की जांच की जाएगी, इसे लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

ग्रामीणों में चिंता का माहौल

एक ही परिवार में दो बच्चों और उनकी मां की मौत के बाद गांव में चिंता का माहौल है। ग्रामीण भी यह जानना चाहते हैं कि तीनों की मौत आखिर किस कारण हुई। यदि किसी बीमारी या अन्य स्वास्थ्य खतरे की वजह सामने आती है तो समय रहते अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना है कि गांव में किसी तरह की संक्रामक बीमारी का प्रकोप तो नहीं है। प्रारंभिक जांच में मलेरिया और टाइफाइड की आशंका कम होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन तीनों मौतों की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के मुताबिक तीनों में बुखार का सामान्य लक्षण नहीं था और सभी में अलग-अलग लक्षण सामने आए थे। ऐसे में विस्तृत जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी।

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