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घड़ी धनबाद कोर्ट में सुरक्षा सख्त
धनबाद: झारखंड के धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में लंबे इंतजार के बाद फैसले की घड़ी आ गई है। 29 जनवरी 2017 को हुई हत्या के मामले में करीब नौ साल की कानूनी प्रक्रिया और 337 तारीखों पर सुनवाई के बाद शनिवार 5 सितंबर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश-16 दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत फैसला सुनाने वाली है। हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए धनबाद पुलिस भी पूरी तरह सतर्क है और कोर्ट परिसर तथा आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह वर्तमान मेयर और तत्कालीन झरिया विधायक संजीव सिंह के बेहद करीबी माने जाते थे। उनकी हत्या ने उस समय पूरे कोयलांचल को हिलाकर रख दिया था। अब इतने वर्षों बाद अदालत का फैसला आने वाला है, इसलिए सिंह मेंशन और रघुकुल के साथ पूरे धनबाद की निगाहें न्यायालय पर टिकी हुई हैं।
29 जनवरी 2017 को हुई थी हत्या
रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम सरायढेला थाना क्षेत्र के चाणक्य नगर इलाके में की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रंजय अपने सहयोगी राजा यादव के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान उन पर गोलियां चलाई गईं। हमले में रंजय सिंह की मौत हो गई जबकि राजा यादव बच गए और बाद में मामले के महत्वपूर्ण गवाह बने। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। केस में आरा के बेरथ निवासी नंद कुमार सिंह उर्फ रूना सिंह उर्फ बबलू सिंह उर्फ मामा को कथित शूटर बताते हुए ट्रायल चलाया गया। पुलिस ने नंद कुमार के बयान के आधार पर रघुकुल से जुड़े हर्ष सिंह को हत्या की साजिश का आरोपी बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। ये अभियोजन के आरोप हैं, जिन पर अदालत का फैसला आना है। पटना निवासी चंदन शर्मा के खिलाफ अलग से ट्रायल शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं कथित रूप से रेकी करने के आरोपी हरेंद्र सिंह का सत्यापन नहीं हो सका है।
337 तारीखों तक चली सुनवाई
रंजय सिंह हत्याकांड का ट्रायल लंबा चला। उपलब्ध अदालती विवरण के मुताबिक फैसले तक पहुंचने में कुल 337 तारीखें लगीं। अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और गवाहों के लिए 144 तारीखों पर कार्यवाही हुई और कुल 23 गवाहों का परीक्षण कराया गया। बचाव पक्ष की दलीलों और गवाही के लिए 130 तारीखें निर्धारित हुईं। आरोपियों के अंतिम सफाई बयान दर्ज करने के लिए 11 तारीखें लगीं, जबकि दोनों पक्षों की अंतिम बहस करीब 30 तारीखों तक चली। इस तरह वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद मामला अब फैसले तक पहुंचा है।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
रंजय हत्याकांड की कानूनी लड़ाई केवल धनबाद की अदालत तक सीमित नहीं रही। इस मामले में विभिन्न पक्षों ने झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड हाईकोर्ट में इस केस से जुड़ी कुल 11 अर्जियां दाखिल की गईं। नंद कुमार सिंह उर्फ मामा ने कई बार जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी जमानत अर्जी वापस लिए जाने के बाद खारिज कर दी गई थी। नंद कुमार अगस्त 2018 से जेल में हैं। हर्ष सिंह की ओर से भी हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। वहीं रंजय सिंह की पत्नी रूमी सिंह ने भी न्याय की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में अर्जी दी थी। इस तरह यह मुकदमा निचली अदालत से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत तक विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरता रहा।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
फैसले को लेकर धनबाद पुलिस-प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। पुलिस की चिंता यह है कि फैसला आने के बाद दोनों पक्षों के समर्थकों की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की गई है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर कुछ दिन पहले भी डीएसपी सीसीआर प्रदीप कुमार साव ने निरीक्षण किया था। उन्होंने व्यवहार न्यायालय, सीजीएम कोर्ट और जेल रोड क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों को समन्वय के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दिए थे। फैसले के दिन समर्थकों की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती भी उसी अनुरूप रखे जाने की तैयारी है। पुलिस का प्रयास है कि न्यायालय की कार्यवाही के दौरान और फैसला आने के बाद किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
नीरज सिंह हत्याकांड के फैसले के समय भी थी कड़ी सुरक्षा
धनबाद में इससे पहले चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड का फैसला 27 अगस्त 2025 को आया था। उस मामले में पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत सभी 10 आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। उस दिन भी कोर्ट और आसपास के इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उस फैसले के दौरान रणधीर वर्मा चौक से डीआरएम ऑफिस चौक तक निषेधाज्ञा लगाने जैसे कदम उठाए गए थे। अब रंजय सिंह हत्याकांड के फैसले के समय भी पुलिस समर्थकों की गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही है।
कोयलांचल की नजर कोर्ट के फैसले पर
रंजय सिंह हत्याकांड धनबाद के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। रंजय की राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से नजदीकी और बाद में सामने आए आरोपों के कारण यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा। अब अदालत के सामने मुख्य सवाल आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का है। अभियोजन पक्ष ने अपने गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध किया है। दोष सिद्ध हुआ या नहीं, इसका निर्धारण अदालत अपने फैसले में करेगी। करीब नौ साल की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद शनिवार का दिन इस केस के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि ट्रायल का सामना कर रहे आरोपियों के खिलाफ अभियोजन अपना मामला साबित करने में सफल रहा या उन्हें राहत मिलेगी। फिलहाल धनबाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई है और पुलिस की नजर न्यायालय के साथ आसपास की गतिविधियों पर भी है। सिंह मेंशन और रघुकुल के समर्थकों से लेकर पूरे कोयलांचल की निगाहें अब जिला एवं सत्र न्यायाधीश-16 दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत से आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
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