गढ़वा। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब रेल परिचालन पर भी दिखाई देने लगा है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल के सोननगर-गढ़वा रोड रेलखंड पर मंगलवार सुबह कोसीआरा और मोहम्मदगंज रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक तक पानी पहुंच गया। इसके कारण इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने प्रभावित हिस्से में ट्रेनों की गति कम कर दी और सावधानी के साथ उनका संचालन कराया।

जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन के पास स्थित आहार का पिंड भारी बारिश और पानी के तेज दबाव के कारण टूट गया। पिंड टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी तेजी से रेलवे लाइन की तरफ बढ़ने लगा। कुछ ही समय में पानी रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया। स्थिति की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया और प्रभावित हिस्से में सुरक्षा उपाय लागू किए गए।

पानी के दबाव से टूटा आहार का पिंड

बताया जा रहा है कि इलाके में लगातार बारिश के कारण आहार में बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया था। जलस्तर बढ़ने के साथ पिंड पर दबाव भी बढ़ता गया। आखिरकार पानी के तेज दबाव के कारण पिंड का एक हिस्सा टूट गया और जमा पानी तेजी से बाहर निकलने लगा।

पानी का बहाव रेलवे लाइन की दिशा में होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई। कुछ ही देर में पानी ट्रैक के आसपास पहुंच गया। रेल पटरियों के पास तेज बहाव होने से ट्रैक की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।

रेलवे के लिए ऐसी स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना होता है कि पानी के कारण ट्रैक के नीचे की मिट्टी या गिट्टी न बहे और रेल लाइन की स्थिरता प्रभावित न हो।

धीमी रफ्तार से निकाली गईं ट्रेनें

रेलवे ट्रैक तक पानी पहुंचने की सूचना के बाद संबंधित अधिकारियों ने प्रभावित हिस्से में ट्रेनों की गति कम करने का फैसला किया। कोसीआरा और मोहम्मदगंज रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाया गया।

इस दौरान लोको पायलटों को भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। रेलवे की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा बनाए रखते हुए रेल परिचालन जारी रखना रही।

ट्रेनों की रफ्तार कम होने के कारण कुछ सेवाओं के समय पर असर पड़ने की संभावना रही। हालांकि सुरक्षा को देखते हुए गति प्रतिबंध आवश्यक कदम माना गया।

ट्रैक की निगरानी बढ़ाई गई

भारी बारिश के दौरान रेलवे ट्रैक के आसपास पानी जमा होना या तेज बहाव पहुंचना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। पानी के दबाव से पटरियों के नीचे बिछी मिट्टी और गिट्टी के खिसकने का खतरा रहता है।

ऐसे में रेलवे कर्मचारी प्रभावित रेलखंड पर ट्रैक की स्थिति की निगरानी करते हैं। पानी का स्तर कम होने के बाद भी यह जांच जरूरी होती है कि पटरियों और ट्रैक के आधार को किसी तरह का नुकसान तो नहीं पहुंचा।

सोननगर-गढ़वा रोड रेलखंड पर भी प्रभावित हिस्से में विशेष सतर्कता बरती गई। ट्रेनों को सामान्य गति से चलाने से पहले ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

यात्रियों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता

रेलवे प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अचानक रेलवे ट्रैक तक पानी पहुंचने के कारण सामान्य रफ्तार से ट्रेन चलाना जोखिमपूर्ण हो सकता था। इसी वजह से तत्काल गति नियंत्रित की गई।

मानसून के दौरान रेलवे कई संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखता है। नदियों, नालों, पुलों और जलाशयों के पास स्थित रेलवे ट्रैक पर जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाती है।

इस घटना में भी पानी का बहाव रेलवे लाइन तक पहुंचने के बाद सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया।

बारिश ने बढ़ाई परेशानी

क्षेत्र में हुई तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। आहार में भी क्षमता से अधिक पानी जमा होने से दबाव बढ़ गया।

स्थानीय स्तर पर आहार का इस्तेमाल पानी जमा करने के लिए किया जाता है। लेकिन लगातार बारिश के दौरान इनमें जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। यदि निकासी पर्याप्त न हो तो पिंड पर दबाव बढ़ने लगता है।

कोसीआरा और मोहम्मदगंज के बीच सामने आई घटना में भी तेज बारिश को पिंड टूटने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

ट्रैक के नीचे कटाव का रहता है खतरा

रेलवे लाइन के पास तेज पानी का बहाव ट्रैक के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है। सबसे बड़ा खतरा ट्रैक के नीचे की मिट्टी और बैलेस्ट के बहने का होता है।

अगर ट्रैक के नीचे का आधार कमजोर हो जाए तो रेल परिचालन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि रेलवे ऐसी स्थिति में तत्काल गति प्रतिबंध लगाकर इंजीनियरिंग टीम से ट्रैक की जांच कराता है।

पानी उतरने के बाद भी ट्रैक की स्थिति की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है। जरूरत पड़ने पर बैलेस्ट भरने, मिट्टी मजबूत करने या अन्य मरम्मत कार्य किए जाते हैं।

रेल परिचालन पर पड़ा असर

सोननगर-गढ़वा रोड रेलखंड महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है। यहां से यात्री और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में किसी हिस्से में गति प्रतिबंध लगने से ट्रेनों के समय पर असर पड़ सकता है।

प्रभावित क्षेत्र में ट्रेनों को धीमी गति से निकालने के कारण यात्रा समय बढ़ सकता है। हालांकि रेलवे के लिए समय से ज्यादा यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।

स्थिति सामान्य होने और ट्रैक की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामान्य गति बहाल की जा सकती है।

मानसून में रेलवे के सामने चुनौती

मानसून के दौरान रेलवे के सामने ट्रैक को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती रहती है। भारी बारिश से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और नदी-नालों के पास कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

कई स्थानों पर बारिश के कारण ट्रैक के नीचे की मिट्टी कमजोर होने की आशंका रहती है। इसलिए संवेदनशील रेलखंडों पर नियमित पेट्रोलिंग और जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कोसीआरा और मोहम्मदगंज के बीच हुई घटना ने एक बार फिर ऐसी निगरानी की जरूरत को सामने रखा है।

स्थिति सामान्य होने तक सतर्कता जरूरी

आहार का पिंड टूटने के बाद निकला पानी ट्रैक तक पहुंचने से रेलवे प्रशासन को तत्काल एहतियाती कदम उठाने पड़े। अब पानी का बहाव कम होने के साथ ट्रैक और आसपास की जमीन की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

यदि बारिश जारी रहती है तो जलस्तर दोबारा बढ़ने का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे में प्रभावित इलाके में लगातार निगरानी आवश्यक है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि पटरियों के नीचे किसी तरह का कटाव नहीं हुआ है और ट्रेन संचालन के लिए ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित है।

फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित हिस्से में ट्रेनों को धीमी गति से चलाया गया। मूसलाधार बारिश और आहार का पिंड टूटने से पैदा हुई स्थिति ने सोननगर-गढ़वा रोड रेलखंड पर रेल परिचालन को प्रभावित किया है। मौसम की स्थिति और ट्रैक की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे की सतर्कता आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी।

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