धनबाद: धनबाद जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि जहां टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण राशि समय पर नहीं मिल पा रही है, वहीं प्रचार-प्रसार के नाम पर नियमों की अनदेखी कर अधिक भुगतान किया गया है।

मामला जिला यक्ष्मा विभाग से जुड़ा है, जहां प्रचार रथ के संचालन के लिए निर्धारित दर से कई गुना अधिक भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। भुगतान को लेकर अब जांच की मांग उठने लगी है।

प्रचार रथ भुगतान में अंतर का आरोप

जानकारी के अनुसार, टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जिले में लोगों को जागरूक करने और टीबी मरीजों की पहचान बढ़ाने के लिए प्रचार रथ चलाया गया था।

बताया जा रहा है कि करार के अनुसार प्रचार रथ के लिए प्रति किलोमीटर 16 रुपये की दर निर्धारित की गई थी। लेकिन आरोप है कि बाद में विभाग की ओर से लगभग 165 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान कर दिया गया।

इस अंतर को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर भुगतान की दर में इतना बड़ा बदलाव किस आधार पर किया गया।

एजेंसी को किया गया छह लाख रुपये का भुगतान

सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरडी इंटरप्राइजेज नामक एजेंसी को करीब छह लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

भुगतान होने के बाद यह मामला चर्चा में आया और अब इसकी जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाली राशि का पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए।

टीबी मरीजों की सुविधाओं पर उठे सवाल

इस मामले को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण सहायता राशि को लेकर पहले से शिकायतें सामने आती रही हैं।

सरकार की ओर से टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई मरीजों को समय पर राशि नहीं मिलने की शिकायत है।

ऐसे में प्रचार-प्रसार के लिए अधिक भुगतान के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टीबी उन्मूलन अभियान का उद्देश्य

केंद्र और राज्य सरकार टीबी को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। इसके तहत मरीजों की जल्द पहचान, जांच, उपचार और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

धनबाद में भी टीबी उन्मूलन अभियान के तहत अधिक से अधिक लोगों की जांच कर मरीजों की पहचान करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए प्रचार-प्रसार की गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, ताकि लोग टीबी के लक्षणों को समझ सकें और समय पर जांच करा सकें।

जांच की उठी मांग

प्रचार रथ भुगतान का मामला सामने आने के बाद अब इसकी जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर भुगतान नियमों के विपरीत हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, स्वास्थ्य विभाग से भी पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगे जाने की संभावना है।

नियमों के पालन पर जोर

स्वास्थ्य योजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सरकारी राशि को लेकर लगातार पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी योजना में खर्च होने वाली राशि का सही उपयोग होना जरूरी है, ताकि उसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंच सके।

अगर प्रचार-प्रसार के नाम पर अधिक भुगतान हुआ है तो इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

विभाग की भूमिका पर नजर

फिलहाल इस मामले में विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि भुगतान में वास्तव में कोई अनियमितता हुई या नहीं।

टीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण अभियान में संसाधनों का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रचार रथ भुगतान को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलना आवश्यक माना जा रहा है।

धनबाद में टीबी मरीजों की सुविधा और अभियान की सफलता के बीच सामने आया यह मामला अब जांच का विषय बन गया है। प्रशासन की ओर से अगर निष्पक्ष जांच की जाती है तो भुगतान से जुड़े पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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