झारखंड: कैबिनेट ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 27 प्रस्ताव पास किए गए, जिनमें प्रशासनिक सुधार, विकास कार्य और रोजगार से जुड़े निर्णय शामिल हैं। सबसे बड़ा फैसला प्रखंड और अंचल स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि 12 से कम पंचायत वाले प्रखंडों में अब बीडीओ और सीओ दोनों के पद नहीं रहेंगे। ऐसे क्षेत्रों में केवल एक ही अधिकारी तैनात होगा, जो या तो बीडीओ होगा या सीओ। इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों में बेहतर समन्वय और दक्षता लाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में कुल 107 ऐसे प्रखंड हैं जहां यह नई व्यवस्था लागू होगी। वहीं 12 से अधिक पंचायत वाले 164 प्रखंडों में पहले की तरह बीडीओ और सीओ दोनों पद बने रहेंगे। इसके अलावा 53 अंचलों में सीओ बीडीओ का भी कार्य देखेंगे, जबकि 54 प्रखंडों में बीडीओ को सीओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी। कैबिनेट विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने बताया कि यह निर्णय पदस्थापन को अधिक युक्तिसंगत बनाने के लिए लिया गया है। इससे उन स्थितियों पर रोक लगेगी, जहां अधिकारियों को उनके पद से अलग जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी।
बैठक में रांची के धुर्वा गोलचक्कर से पुलिस हेडक्वार्टर तक 2.697 किलोमीटर लंबी सड़क को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित करने की भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर 36 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसमें साइकिल ट्रैक, पैदल पथ और बैठने की व्यवस्था भी शामिल होगी। इसके साथ ही रोजगार से जुड़े एक अहम निर्णय में मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन लागू करने का प्रस्ताव पास किया गया है। इस योजना के तहत 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि आदिम जनजातियों को अतिरिक्त 150 दिन का रोजगार मिलेगा।
कैबिनेट ने सोन नदी जल बंटवारे पर भी बड़ा फैसला लेते हुए झारखंड और बिहार के बीच एमओयू को मंजूरी दी है। इस समझौते के तहत झारखंड को 2.00 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया है, जिससे सिंचाई परियोजनाओं को गति मिलेगी।
इन फैसलों से राज्य में प्रशासनिक सुधार, रोजगार और विकास कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।