चरही घाटी के एक्सीडेंट जोन से मिलेगी राहत, 40 करोड़ से बनेगा फोरलेन बाईपास
हजारीबाग। हजारीबाग-रांची फोरलेन सड़क पर स्थित चरही घाटी के खतरनाक घुमावदार हिस्से को अब बाईपास करने की तैयारी तेज हो गई है। लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील माने जाने वाले इस एक्सीडेंट जोन से राहत दिलाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) नई फोरलेन सड़क बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
एनएचएआई करीब 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ढाई से तीन किलोमीटर लंबी नई फोरलेन सड़क का निर्माण करेगा। इस बाईपास के बनने के बाद वाहन चालकों को चरही घाटी के घुमावदार और दुर्घटनाप्रवण हिस्से से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होने और हादसों में कमी आने की उम्मीद है।
चरही घाटी हजारीबाग-रांची मार्ग का ऐसा हिस्सा है, जहां तीखे मोड़, ढलान और घुमावदार सड़क के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती रही हैं। खासकर भारी वाहनों के लिए यह मार्ग काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। कई बार तेज गति या वाहन पर नियंत्रण खोने की वजह से यहां हादसे हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की लंबे समय से मांग रही है कि इस खतरनाक हिस्से का स्थायी समाधान निकाला जाए। अब एनएचएआई ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, बाईपास निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस परियोजना में कई बड़ी निर्माण कंपनियों ने रुचि दिखाई है और टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
योजना के मुताबिक, यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो अगस्त के बाद बाईपास निर्माण का काम शुरू होने की संभावना है। एनएचएआई ने इस सड़क को करीब एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
नई फोरलेन सड़क बनने से हजारीबाग-रांची मार्ग पर यातायात व्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है। वर्तमान में चरही घाटी के संकरे और घुमावदार हिस्से में कई बार वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे जाम की स्थिति भी बनती है। बाईपास बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।
सड़क विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल यातायात नियमों का पालन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क की डिजाइन और संरचना में सुधार भी जरूरी होता है। चरही घाटी जैसे स्थानों पर बाईपास निर्माण से दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकती है।
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। नई सड़क का निर्माण आधुनिक मानकों के अनुसार किया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को सुरक्षित और बेहतर मार्ग मिल सके।
स्थानीय लोगों को भी इस परियोजना से काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि चरही घाटी में लगातार हादसों के कारण लोगों में डर बना रहता था। बाईपास बनने के बाद यात्रियों और आसपास के ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
हजारीबाग-रांची फोरलेन सड़क झारखंड के प्रमुख मार्गों में शामिल है। इस मार्ग से बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। औद्योगिक गतिविधियों और रोजाना आवागमन के कारण इस सड़क का महत्व काफी अधिक है।
चरही घाटी के दुर्घटनाप्रवण हिस्से को हटाने की योजना लंबे समय से चर्चा में थी। अब टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बाद परियोजना के धरातल पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।
अधिकारियों का मानना है कि बाईपास बनने के बाद न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यात्रा का समय भी कम होगा। साथ ही, भारी वाहनों के सुरक्षित संचालन में भी मदद मिलेगी।
फिलहाल एनएचएआई निर्माण प्रक्रिया को जल्द शुरू करने की तैयारी में जुटा है। आने वाले महीनों में इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का काम शुरू होने की संभावना है।
चरही घाटी बाईपास परियोजना को हजारीबाग-रांची मार्ग की सुरक्षा और यातायात सुधार के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद इस मार्ग पर सफर पहले से अधिक सुरक्षित और आसान होने की उम्मीद है।