गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी में गुरुवार को प्रधानाध्यापक के तबादले के विरोध में स्कूली बच्चों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़क पर उतर आए और कांडी-भवनाथपुर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। करीब सात घंटे तक चले आंदोलन के दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही। प्रधानाध्यापक की दोबारा कांडी में पदस्थापना का आदेश जारी होने के बाद बच्चों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
यह मामला कांडी प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय का है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मलय कुमार सिंह का 12 अगस्त को तबादला कर दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में विद्यार्थी विद्यालय के बाहर एकत्रित हुए। प्रदर्शन में शामिल अधिकतर बच्चों की उम्र 10 से 13 वर्ष के बीच बताई गई है।
बच्चे हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर प्रधानाध्यापक का तबादला वापस लेने की मांग कर रहे थे। उन्होंने मुख्य सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर कम उम्र के बच्चों के इस प्रदर्शन को जेन अल्फा आंदोलन भी कहा जाने लगा।
 प्रधानाध्यापक के समर्थन में उतरे विद्यार्थी
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं का कहना था कि मलय कुमार सिंह के प्रधानाध्यापक बनने के बाद विद्यालय की व्यवस्था में सुधार हुआ है। बच्चों के मुताबिक विद्यालय में पढ़ाई, अनुशासन और दूसरी व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुई हैं। इसी कारण वे उनका तबादला स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे।
सड़क जाम होने के कारण कांडी-भवनाथपुर मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। दोनों तरफ यात्री और मालवाहक वाहन खड़े हो गए। लंबे समय तक जाम नहीं खुलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोग भी प्रदर्शन कर रहे बच्चों को देखकर हैरान थे।
मारपीट के आरोप के बाद बिगड़ा माहौल
आंदोलन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रखंड प्रमुख सत्येंद्र पांडेय पर कथित रूप से एक बच्चे को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और थाने का घेराव कर दिया। हालांकि, प्रखंड प्रमुख ने बच्चे के साथ मारपीट करने के आरोप को खारिज किया है।
तनाव के बीच पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पथराव में मोहम्मद अशफाक आलम नामक पुलिसकर्मी घायल हो गया। प्रखंड प्रमुख सत्येंद्र पांडेय के वाहन का शीशा भी टूट गया। हालांकि, पथराव किसने किया, इसे लेकर अधिकारियों और स्थानीय पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
कांडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि बच्चों में से किसी ने पथराव नहीं किया। वहीं, सत्येंद्र पांडेय ने दावा किया कि उनकी गाड़ी पर हमला विद्यार्थियों ने नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति से जुड़े कुछ असामाजिक तत्वों ने किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारी बच्चों से कोई शिकायत नहीं है।
 अधिकारियों ने संभाली स्थिति
प्रदर्शन और पथराव की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अवर निरीक्षक ब्रिज कुमार, गढ़वा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दिलु लोहारा और बीडीओ राकेश सहाय ने बच्चों तथा अन्य प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों को सड़क से हटाने और यातायात सामान्य कराने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे प्रधानाध्यापक की वापसी का लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं थे। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया कि उनकी मांग जिला स्तर तक पहुंचाई गई है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला मुख्यालय में अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक के तबादले से संबंधित स्थिति की समीक्षा की। काफी देर तक चली बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद मलय कुमार सिंह की दोबारा कांडी में पदस्थापना का पत्र जारी कर दिया गया।
 आदेश जारी होने के बाद खुला मार्ग
प्रधानाध्यापक की पुनः पदस्थापना का आदेश मिलने के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क से हट गए। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कांडी-भवनाथपुर मार्ग पर यातायात सामान्य कराया। करीब सात घंटे तक जाम में फंसे वाहनों को धीरे-धीरे निकाला गया।
घटना के बाद पथराव, सरकारी काम में बाधा और वाहन में तोड़फोड़ के मामले की जांच की जा सकती है। प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती भी है कि स्कूली बच्चों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच हिंसा कैसे शुरू हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। अधिकारियों ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी विवाद को बातचीत के माध्यम से हल करने की अपील की है।
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