केनरा बैंक की तिजोरी से 1 करोड़ का सोना गायब, पूर्व मैनेजर पर FIR

Update: 2026-07-22 16:31 GMT

जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में केनरा बैंक की एक शाखा से करीब 1.10 करोड़ रुपये का सोना गायब होने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिस घटना को लेकर अब पुलिस कार्रवाई शुरू हुई है, उसकी जानकारी सामने आने के करीब दो साल बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने इस मामले में बैंक के पांच पूर्व अधिकारियों समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला मानगो के आजादनगर थाना क्षेत्र स्थित केनरा बैंक की कबीर मेमोरियल शाखा का है। यहां गोल्ड लोन के तहत ग्राहकों द्वारा गिरवी रखा गया करीब 1,10,48,000 रुपये मूल्य का सोना तिजोरी से गायब पाया गया। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार यह घटना 12 जून से 18 जून 2024 के बीच की बताई जा रही है, लेकिन पुलिस में शिकायत 21 जुलाई 2026 को दर्ज कराई गई।

केनरा बैंक के रीजनल मैनेजर मंगेश रामानाथन की शिकायत के आधार पर आजादनगर थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में बैंक के तत्कालीन और पूर्व अधिकारियों को आरोपी बनाया है। नामजद आरोपियों में तत्कालीन सीनियर मैनेजर और प्रथम लॉकर इंचार्ज मोहम्मद शाबीर, गोल्ड लोन अधिकारी इमरान खान, द्वितीय चाबी अधिकारी सूरज टुडू, अधिकारी रिया घोष और शाखा प्रभारी अनुज टोप्पो के अलावा दो अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है।

बैंक प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान समय में इनमें से कोई भी अधिकारी उस शाखा में तैनात नहीं है। बैंक में हुए नियमित ऑडिट के दौरान जब तिजोरी में रखे सोने के रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई पैकेट गायब मिले। इसके बाद बैंक ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की और मामले की जानकारी पुलिस को दी।

बैंक की तिजोरी को बेहद सुरक्षित माना जाता है और उसमें रखे सामान तक पहुंच केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों को ही होती है। ऐसे में पुलिस को शुरुआती जांच में आशंका है कि यह मामला अंदरूनी मिलीभगत से जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तिजोरी किस समय और किस अधिकारी की मौजूदगी में खोली गई थी।

जांच के दौरान पुलिस कई अहम बिंदुओं पर फोकस कर रही है। इसमें तिजोरी खोलने वाली चाबियों का रिकॉर्ड, लॉकर एक्सेस की जानकारी, सीसीटीवी फुटेज, एंट्री रजिस्टर और बैंक दस्तावेजों की जांच शामिल है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं तिजोरी या सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी को लेकर उठ रहा है। जून 2024 में हुई घटना की शिकायत करीब दो साल बाद क्यों की गई, यह भी जांच का हिस्सा है। इसके अलावा बैंक ऑडिट में इतनी बड़ी गड़बड़ी समय रहते क्यों सामने नहीं आई, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आजादनगर क्षेत्र में बैंक की तिजोरी से सोना गायब होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा की एक शाखा से करीब 272 ग्राम सोना गायब होने का मामला सामने आया था, जिसकी कीमत 30 लाख रुपये से अधिक बताई गई थी। उस मामले में बैंक कर्मचारी शत्रुघन कुमार चौधरी को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन गायब सोना अब तक बरामद नहीं हो सका।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल केनरा बैंक गोल्ड चोरी मामले में पुलिस सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह लापरवाही का मामला है या फिर किसी बड़ी साजिश के तहत सोना गायब किया गया।

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