
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में CID ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने JPSC की पूर्व प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद शुरू हुई जांच के तहत की गई है। मामले में परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसा गया है।
CID ने मंगलवार को रांची पुलिस के साथ मिलकर JPSC कार्यालय और परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान जांच टीम ने डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की थी। इसके बाद बुधवार को CID ने पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई।
गिरफ्तार किए गए आरोपितों में JPSC की पूर्व प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के अलावा TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, कंपनी के निदेशक राजवीर सिंह और एजेंसी से जुड़े कर्मचारी उस्मान व अवध शामिल हैं। CID अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मामले की जांच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री को 14वीं JPSC परीक्षा के परिणामों में कथित अनियमितताओं और पहले भी हुई गड़बड़ियों को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद उन्होंने CID को पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि JPSC और परीक्षा संचालन एजेंसी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। आरोपों में जालसाजी, आपराधिक साजिश, पेपर लीक, ओएमआर शीट में बदलाव, डिजिटल टैंपरिंग, अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि वह JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कई परीक्षाओं में कथित तौर पर अनुचित तरीके से सफल होता रहा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वह कई परीक्षाओं में शीर्ष स्थानों पर रहा था।
जांच के दायरे में परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी TDPL भी है। आरोप है कि कंपनी को गंभीर अनियमितताओं के चलते झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग ने मई 2025 में ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद कंपनी पर जून 2025 से परीक्षाओं के संचालन से जुड़े काम करने के आरोप लगाए गए हैं। CID अब कंपनी की भूमिका और इससे जुड़े सभी आरोपों की जांच करेगी।
इधर, 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता राजेश प्रसाद ने परीक्षा प्रक्रिया में कई खामियों का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि कटऑफ अंक जारी करने, ओएमआर शीट अपलोड करने और परीक्षा परिणाम में सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर जैसी प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही बरती गई।
याचिका में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं के कारण पूरी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए।
झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की है। अब सभी की नजरें CID जांच और हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। JPSC परीक्षा विवाद के बीच अभ्यर्थियों में भी नाराजगी बढ़ रही है और वे निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।





