फेस बायोमेट्रिक से जुड़ेगा डॉक्टरों का वेतन मेडिकल कॉलेजों में नया नियम लागू
हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं
रांची : झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपस्थिति व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है। अब डॉक्टरों को दिन में दो बार फेस बायोमेट्रिक अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। नई व्यवस्था के तहत हाजिरी को सीधे वेतन भुगतान से जोड़ा जाएगा। यानी निर्धारित समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले डॉक्टरों के वेतन पर असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए डिजिटल निगरानी जरूरी है।
सुबह और शाम दर्ज करनी होगी हाजिरी
नई व्यवस्था के अनुसार डॉक्टरों को ड्यूटी शुरू होने और खत्म होने के समय फेस बायोमेट्रिक के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इससे डॉक्टरों के आने-जाने का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उपस्थिति में पारदर्शिता आएगी। फेस बायोमेट्रिक सिस्टम में चेहरे की पहचान के जरिए हाजिरी दर्ज होती है, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति के जरिए उपस्थिति लगाने की संभावना कम हो जाती है।
वेतन से जुड़ेगा अटेंडेंस रिकॉर्ड
अब डॉक्टरों की उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर वेतन प्रक्रिया को जोड़ा जाएगा। जिन डॉक्टरों की उपस्थिति नियमित नहीं होगी या जो निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मेडिकल कॉलेजों में अनुशासन बढ़ेगा और मरीजों को समय पर डॉक्टरों की सुविधा मिल सकेगी।
सभी मेडिकल कॉलेजों में लागू होगी व्यवस्था
यह व्यवस्था रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) समेत झारखंड के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू करने की तैयारी है। खासकर सीनियर डॉक्टरों और फैकल्टी की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में अक्सर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और समय पर उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई डिजिटल व्यवस्था से प्रशासन को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कोशिश
झारखंड सरकार का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी बढ़ने से ओपीडी सेवाओं, वार्ड प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं में सुधार की उम्मीद है। हालांकि डॉक्टर संगठनों की ओर से इस व्यवस्था को लेकर प्रतिक्रिया आना बाकी है। सरकार का कहना है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।