जम्मू । मानसून की लगातार बारिश के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में जमा बरसाती पानी अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और पानी की निकासी नहीं होने के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। नगर निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों में मच्छरों की बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराजगी के साथ-साथ स्वास्थ्य को लेकर चिंता का माहौल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद सड़कों, खाली प्लॉटों, गलियों और निचले इलाकों में पानी जमा है। कई स्थानों पर लंबे समय से पानी नहीं निकलने के कारण वहां गंदगी और बदबू की समस्या भी पैदा हो गई है। इसी जमा पानी में मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ गई है। शाम होते ही कई इलाकों में मच्छरों की संख्या इतनी अधिक हो जाती है कि लोगों को घरों में भी राहत नहीं मिलती।

निवासियों के मुताबिक, जलभराव केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश का पानी समय पर नहीं निकाला गया और प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से कीटनाशक एवं मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष चिंता है। बारिश के मौसम में मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने से इन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को अपने बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना पड़ रहा है।

बच्चों और बुजुर्गों को लेकर लोगों की चिंता सबसे अधिक है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि छोटे बच्चे घर के आसपास खेलते हैं और उन्हें मच्छरों से बचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वहीं, बुजुर्गों को भी संक्रमण का खतरा अधिक महसूस हो रहा है। कई परिवारों ने घरों में मच्छरदानी, रिपेलेंट और अन्य उपायों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक आसपास जमा पानी और मच्छरों के स्रोत खत्म नहीं होंगे, तब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

स्थानीय लोगों ने नगर निगम से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिन इलाकों में पानी जमा है, वहां पंप या अन्य माध्यमों से पानी निकालने की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही नालियों की सफाई और उनकी नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि बारिश का पानी दोबारा जमा न हो।

निवासियों ने प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशक और मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव की भी मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल मुख्य सड़कों पर छिड़काव करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। खाली प्लॉट, नालियों के आसपास के क्षेत्र, जलभराव वाले स्थान और आवासीय इलाकों की गलियों में भी नियमित रूप से दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।

लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर नालियों में कचरा जमा होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। बारिश के दौरान पानी तेजी से भर जाता है और लंबे समय तक जमा रहता है। यदि नालियों की समय पर सफाई की जाए तो जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से सफाई व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने की मांग की है।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच लोगों ने प्रशासन से जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की है। नागरिकों का कहना है कि बारिश के मौसम में लोगों को साफ-सफाई, जमा पानी को हटाने और मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को संभावित मामलों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या हर साल मानसून के दौरान सामने आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से पहले नालों और नालियों की सफाई के साथ-साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिए। केवल बारिश के बाद राहत कार्य करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिससे भारी बारिश के दौरान भी पानी अधिक समय तक जमा न रहे।

निवासियों का कहना है कि मच्छरों की बढ़ती संख्या ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। शाम के समय लोग घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं। कई जगह लोगों को मच्छरों के कारण बाहर निकलने में भी परेशानी हो रही है। ऐसे में नागरिकों ने नगर निगम से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल शहर में बारिश के बाद बने जलभराव और मच्छरों के प्रकोप को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। नागरिकों की मांग है कि नगर निगम प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर पानी की निकासी कराए, नालियों की सफाई सुनिश्चित करे और मच्छररोधी दवाओं का नियमित छिड़काव शुरू करे। लोगों का कहना है कि समय रहते कदम उठाए गए तो संभावित बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है और मानसून के दौरान नागरिकों को राहत मिल सकती है।

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