श्रीनगर,  भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए, जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश भर में इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) सेवाओं के आयोजन और उन्हें उपलब्ध कराने के लिए तय दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु विशेषज्ञों और हितधारकों की एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 3 नवंबर को जारी सरकारी आदेश संख्या 757-JK (HME) के अनुसार, इस समिति को स्वास्थ्य संस्थानों में क्रिटिकल-केयर सुविधाओं की कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने के लिए एक व्यापक, समयबद्ध रोडमैप तैयार करने का काम सौंपा गया है।
यह कदम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'असित बरन मंडल और अन्य बनाम डॉ. रीता सिन्हा और अन्य' (सिविल अपील संख्या 8402/2016) मामले में दिए गए निर्देशों के बाद उठाया गया है। इसमें विशेष रूप से 20 मई और 21 सितंबर को दिए गए वे आदेश शामिल हैं, जो इंटेंसिव केयर सेवाओं के आयोजन और उन्हें उपलब्ध कराने से जुड़े दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन के बारे में हैं। यह समिति स्वास्थ्य संस्थानों की लेवल-I, लेवल-II और लेवल-III ICU सेवाएं प्रदान करने की तैयारियों का आकलन करेगी। साथ ही, यह बुनियादी ढांचे, चिकित्सा उपकरणों, क्रिटिकल-केयर मैनपावर, नर्सिंग स्टाफ, अन्य स्वास्थ्य कर्मियों, संक्रमण नियंत्रण और रोगी सुरक्षा व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों की पहचान करेगी।
KNO द्वारा देखे गए आदेश के अनुसार, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू के एनेस्थिसियोलॉजी/क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख इस समिति के अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा, SKIMS सौरा और GMC श्रीनगर के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागों के प्रतिनिधि भी इसके सदस्य होंगे। अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों - जैसे GMC अनंतनाग, बारामूला, कठुआ, राजौरी, डोडा, उधमपुर और हंदवाड़ा - के एनेस्थिसियोलॉजी/क्रिटिकल केयर विभागों के प्रमुखों को भी इस पैनल में शामिल किया गया है।
समिति में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव (कानून); उप सचिव (MR) - जो सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे; जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड (JKMSCL) के महाप्रबंधक; और जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य सेवाओं के उप निदेशक भी शामिल होंगे। इसमें अकाउंट्स सर्विस का एक प्रतिनिधि शामिल होगा जिसे डायरेक्टर फाइनेंस द्वारा नामित किया जाएगा; साथ ही, दो ऐसे निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि भी होंगे जिनमें ICU और क्रिटिकल-केयर की सुविधाएं मौजूद हैं। समिति की मुख्य जिम्मेदारियों में मौजूदा ICU गाइडलाइंस, कंप्लायंस मैट्रिक्स और गैप एनालिसिस रिपोर्ट की समीक्षा करना शामिल है, ताकि अलग-अलग स्तर की इंटेंसिव केयर सेवाओं के लिए तय मानकों के मुकाबले हर संस्थान में मौजूद कमियों की पहचान की जा सके।
यह समिति विशेषज्ञों, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य प्रशिक्षित हेल्थकेयर कर्मियों की उपलब्धता से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए एक समयबद्ध रणनीति भी तैयार करेगी। इसके अलावा, यह उपकरणों, बुनियादी ढांचे, मेडिकल सुविधाओं, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण, सुरक्षा इंतजामों और क्रिटिकल-केयर से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग की जरूरतों का भी आकलन करेगी।
इस आदेश में पूरे जम्मू-कश्मीर में टेली-ICU और टेली-कंसल्टेशन सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। समिति से कहा गया है कि वह ICU बेड की उपलब्धता की रियल-टाइम जानकारी देने और हेल्थकेयर संस्थानों के बीच बेहतर रेफरल लिंक बनाने के तरीके सुझाए, ताकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सही इलाज मिल सके। इस कवायद का एक और अहम पहलू एम्बुलेंस और रेफरल सेवाओं का आकलन करना है। समिति को इनकी पर्याप्तता की जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय सुझाने को कहा गया है कि गंभीर मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उनकी स्थिति स्थिर करने के लिए जरूरी उपकरणों से लैस एम्बुलेंस उपलब्ध हों।
समिति यह भी देखेगी कि ICU और क्रिटिकल-केयर सुविधाएं चलाने वाले निजी अस्पताल और संस्थान तय गाइडलाइंस का पालन कर रहे हैं या नहीं, और जहां भी कमियां मिलें, वहां सुधार के उपाय सुझाएगी। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी, दूर-दराज और भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों में स्थित हेल्थकेयर संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समिति इन जगहों पर मौजूद सुविधाओं के सामने आने वाली खास चुनौतियों का आकलन करेगी, अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी और एक तय समय-सीमा के साथ उचित कदम उठाने की सिफारिश करेगी। क्रिटिकल-केयर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, समिति को फंडिंग के संभावित स्रोतों का पता लगाने का काम भी सौंपा गया है। इसमें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से मिलने वाली मदद और अन्य अधिकृत स्रोत शामिल हो सकते हैं।
अपने काम के हिस्से के रूप में, समिति एक व्यापक, संस्थान-वार एक्शन प्लान तैयार करेगी। इसमें मौजूदा कमियों, सुधार के उपायों, वित्तीय और संसाधनों की जरूरतों, इसे लागू करने वाली एजेंसियों और काम पूरा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा की पहचान की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समिति को सरकारी आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपना संयुक्त एक्शन प्लान/रोडमैप, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के कमिश्नर/सचिव को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
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