J&K जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, विकास कार्यों, प्रशासनिक मामलों और जनता से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया है और इस वादे को पूरा किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से भी अलग-अलग मौकों पर राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई है, हालांकि इसकी समयसीमा को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।
अमित शाह के साथ बैठक को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और प्रशासनिक भविष्य से जुड़े विषयों पर केंद्र के साथ संवाद जारी रखने पर जोर दिया। राज्य का दर्जा बहाल होने से जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार की प्रशासनिक भूमिका और अधिकारों को लेकर भी व्यापक चर्चा होती रही है। बैठक में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना रही। केंद्र सरकार के लिए जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिक मुद्दों में शामिल है। वहीं, प्रदेश सरकार का जोर सामान्य स्थिति को मजबूत करने, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर रहा है।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ सड़क, रेल, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को गति देना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र के समक्ष प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दे उठाए जाने को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए राज्य का दर्जा एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में पुनर्गठित किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया था।
इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए गए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को अपनी सरकार के प्रमुख एजेंडे में रखा है। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से शासन व्यवस्था और मजबूत होगी तथा लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं को भी बल मिलेगा। अमित शाह से मुलाकात ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब जम्मू-कश्मीर में विकास और प्रशासन से जुड़े कई मुद्दों पर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि स्थानीय सरकार क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देती रही है।
बैठक में रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी अहम रहे। जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में युवा रोजगार के अवसरों की तलाश में हैं। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, पर्यटन, उद्योग और स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। प्रदेश सरकार केंद्र से आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग की अपेक्षा करती है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
कृषि और बागवानी क्षेत्र भी जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। खासकर कश्मीर का सेब उद्योग लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। परिवहन, बाजार, भंडारण और निर्यात से जुड़े मुद्दों को बेहतर बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच समन्वय से इन क्षेत्रों को और मजबूत किया जा सकता है। बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच संवाद को बनाए रखना भी है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विकास, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े विषयों पर बातचीत को आगे बढ़ाना प्रदेश के हित में माना जाता है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के बीच होने वाली ऐसी बैठकों से नीतिगत स्तर पर समन्वय को बढ़ावा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, उमर अब्दुल्ला और अमित शाह की मुलाकात जम्मू-कश्मीर के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग इस बैठक के प्रमुख मुद्दों में रही, जबकि सुरक्षा, विकास, रोजगार और अन्य क्षेत्रीय विषयों पर भी चर्चा हुई। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार की मांगों पर किस तरह आगे बढ़ा जाता है।