Jammu and Kashmir दिल्ली की एक अदालत ने हवाला चैनलों के माध्यम से पाकिस्तान से प्राप्त कथित धन से संबंधित एक मामले में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का बुधवार को निर्देश दिया। पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर को पारित एक आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ "प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह" था और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया।
आरोपियों में मलिक, जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मेसर्स ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसर्रत आलम भट शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों से धन प्राप्त किया और उसका इस्तेमाल अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने और विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया।
आरोप औपचारिक रूप से 30 सितंबर को तय किए जाने थे। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के कारण आरोपी को अदालत में शारीरिक रूप से पेश नहीं किया जा सका। अदालत ने ईडी को निर्देश दिया कि आरोपों पर आरोपियों द्वारा संबंधित जेलों में हस्ताक्षर किए जाएं जहां वे बंद हैं। मामला अब 30 अक्टूबर को आगे की कार्यवाही के लिए आएगा।
ईडी का मामला 2017 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर से उपजा है। एनआईए मामले में भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों सहित कई अपराध शामिल हैं।