श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को “गुलाम बनाने” की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़े प्रस्ताव को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। भाजपा ने राज्य के दर्जे की बहाली का समर्थन किया है, लेकिन प्रस्ताव में पुराने स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्तावों के संदर्भ पर आपत्ति जताई है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “बीजेपी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुलाम बनाना चाहती है। यह कोई नई बात नहीं है।” उनका यह बयान विधानसभा के शरद सत्र के बाद सामने आया, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करने समेत कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
फारूक अब्दुल्ला ने विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे जाने और उन्हें निशाना बनाए जाने को भी विधायी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा का उद्देश्य ही अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करना, सरकार की कमियों और गलतियों को सामने लाना तथा सरकार से उनका जवाब मांगना है। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को सदन में उठने वाले सवालों का सामना करना पड़ता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष की टिप्पणी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़े प्रस्ताव पर हुए विवाद के संदर्भ में आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की थी। प्रस्ताव में वर्ष 2000 और 2024 में विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया था।
भाजपा ने इसी संदर्भ को लेकर प्रस्ताव का विरोध किया। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे प्रस्ताव की भाषा और पहले के स्वायत्तता तथा विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्तावों के संदर्भ पर आपत्ति है। भाजपा का कहना है कि राज्य के दर्जे की बहाली को अनुच्छेद 370, विशेष दर्जे या पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
वर्ष 2000 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने उस समय फारूक अब्दुल्ला की सरकार के दौरान स्वायत्तता से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया था। वहीं नवंबर 2024 में विधानसभा ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटी की बहाली के लिए संवाद की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। मौजूदा प्रस्ताव में इन दोनों प्रस्तावों का उल्लेख किए जाने के कारण भाजपा ने इसका विरोध किया।
विधानसभा में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताते हुए सदन में विरोध किया। दूसरी तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की गई है और इसे केंद्र सरकार को भेजने की बात कही गई है।
फारूक अब्दुल्ला ने विधानसभा में हुई बहस को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि सदन में सरकार से सवाल पूछना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है और सरकार की गलतियों को सामने लाकर उससे जवाब मांगा जाता है। मुख्यमंत्री को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जाने को भी उन्होंने इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
शरद सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रोजगार, आरक्षण, कर्मचारियों के नियमितीकरण, बिजली दरों और अन्य जनहित से जुड़े विषयों को विधायकों ने सदन में उठाया। राज्य के दर्जे की बहाली का मुद्दा हालांकि सत्र के सबसे प्रमुख राजनीतिक विषयों में शामिल रहा।
जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 में पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग क्षेत्र की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही है। भाजपा भी राज्य का दर्जा बहाल किए जाने का समर्थन करने की बात कहती है, लेकिन मौजूदा विधानसभा प्रस्ताव में पुराने स्वायत्तता और विशेष दर्जे के संदर्भ को लेकर उसका विरोध है।
इसी राजनीतिक विवाद के बीच फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को “गुलाम बनाने” की कोशिश करने का आरोप लगाया है। यह नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष का राजनीतिक आरोप है। भाजपा की ओर से मौजूदा विवाद में कहा गया है कि उसकी आपत्ति राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से नहीं, बल्कि प्रस्ताव में पूर्व-2019 स्थिति और पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव से जुड़े संदर्भों से है।
फारूक अब्दुल्ला ने साथ ही विधानसभा में सवाल-जवाब और सरकार की आलोचना को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि सदन का काम मुद्दों पर चर्चा करना और सरकार से जवाब मांगना है। उनके बयान के बाद जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे और विधानसभा में पारित प्रस्ताव को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं।
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