कश्मीर के छोटे घोड़े की बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
नई स्वदेशी नस्ल के रूप में हुआ पंजीकरण
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी पशु विरासत को बड़ी पहचान मिली है। कश्मीर पोनी को अब देश की नई स्वदेशी घोड़ा नस्ल के रूप में आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है। यह उपलब्धि शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST-K) के वैज्ञानिकों के शोध और प्रयासों का परिणाम है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की नस्ल पंजीकरण समिति ने कश्मीर पोनी को स्वदेशी अश्व नस्ल के तौर पर मान्यता दी है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को इस नस्ल का मूल क्षेत्र यानी होम ट्रैक्ट घोषित किया गया है। इस वैज्ञानिक पंजीकरण से कश्मीर पोनी को देशभर में एक अलग पहचान मिलेगी।
वैज्ञानिकों के प्रयासों से मिली सफलता
कश्मीर पोनी की पहचान स्थापित करने के लिए SKUAST-K के पशु आनुवंशिकी और प्रजनन विभाग के वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक शोध, दस्तावेजीकरण और नस्ल के वैज्ञानिक अध्ययन पर काम किया। इस परियोजना में वैज्ञानिकों ने कश्मीर पोनी के शारीरिक गुणों, आनुवंशिक विशेषताओं और उपयोगिता का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नस्ल कश्मीर के कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में आसानी से अनुकूलित होने की क्षमता रखती है। पहाड़ी इलाकों में इसकी मजबूती और सहनशीलता इसे अन्य घोड़ों से अलग बनाती है।
कश्मीर की पशु विरासत को संरक्षण मिलेगा
राष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद कश्मीर पोनी के संरक्षण और योजनाबद्ध प्रजनन को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इस अनोखी नस्ल को विलुप्त होने से बचाने में मदद मिलेगी और इसके विकास के नए रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा कश्मीर पोनी का इस्तेमाल पर्यटन, ग्रामीण आजीविका और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी किया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में यह पोनी लंबे समय से लोगों के जीवन का हिस्सा रही है।
स्थानीय लोगों के लिए बढ़ेंगे अवसर
कश्मीर पोनी को मिली राष्ट्रीय मान्यता से पशुपालकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। अब इस नस्ल की पहचान बढ़ने के साथ इसके पालन, प्रजनन और संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों की मदद से इस नस्ल के लिए बेहतर प्रजनन कार्यक्रम और संरक्षण योजनाएं तैयार की जा सकती हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आय के नए साधन विकसित होंगे।
जम्मू-कश्मीर के लिए गौरव का क्षण
कश्मीर पोनी का राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण जम्मू-कश्मीर की समृद्ध जैविक और पशु आनुवंशिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह न सिर्फ एक घोड़ा नस्ल की पहचान है, बल्कि क्षेत्र की पारंपरिक धरोहर को वैज्ञानिक मान्यता मिलने का भी प्रतीक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में कश्मीर पोनी को लेकर और शोध किए जाएंगे, ताकि इसकी विशेषताओं का बेहतर उपयोग किया जा सके और इसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सके।