राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर जम्मू पहुंचे डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी विरासत को आगे बढ़ाने का दिया भरोसा
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने जम्मू में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने हथकरघा और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों और बुनकरों की मेहनत को सराहा तथा प्रदेश की समृद्ध हस्तकरघा विरासत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कारीगरों और बुनकरों ने अपने बुजुर्गों से मिली विरासत को आज भी संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार इन कारीगरों को यह भरोसा दिलाने के लिए उनके बीच आई है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और पारंपरिक कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
सुरिंदर चौधरी ने कहा कि हथकरघा केवल कपड़ा तैयार करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बुनकर और कारीगर अपनी कला के जरिए प्रदेश की विरासत को देश और दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में पारंपरिक हस्तकरघा उत्पादों के सामने बाजार, तकनीक और आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास होना चाहिए कि कारीगरों को बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके और उन्हें अपनी मेहनत का उचित लाभ मिल सके।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में पारंपरिक हथकरघा उत्पादों और स्थानीय कारीगरों की कला को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बुनकरों और हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मान देना तथा लोगों को स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। उन्होंने कारीगरों और बुनकरों से अपनी पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार नए उत्पाद और डिजाइन तैयार करने का भी आह्वान किया।