जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का आरोप, BJP की जीत के बाद सियासी विवाद तेज
Srinagar श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटों में से एक पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस चुनाव परिणाम को लेकर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। NC ने दावा किया है कि BJP को अपने विधायकों की संख्या से अधिक “एक्स्ट्रा वोट” मिले हैं, जबकि पीडीपी (PDP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
अक्टूबर 2025 में हुए इस चुनाव में, जो लगभग एक दशक बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा चुनाव के रूप में आयोजित किया गया था, परिणाम NC के पक्ष में 3-1 रहा। इस चुनाव में NC के उम्मीदवार चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू और गुरविंदर सिंह ओबेरॉय विजयी रहे, जबकि BJP के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने चौथी सीट पर जीत दर्ज की।
विवाद की मुख्य वजह BJP को मिले वोटों की संख्या बताई जा रही है। पार्टी के पास विधानसभा में 28 विधायक हैं, लेकिन उसे चुनाव में 32 वोट प्राप्त हुए। इस अंतर को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि BJP को अन्य दलों के कुछ विधायकों का समर्थन मिला, जिससे क्रॉस वोटिंग हुई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस नतीजे को “धोखा” करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी का कोई भी वोट इधर-उधर नहीं गया है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं।
इसी बीच NC ने RTI के तहत प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए PDP पर भी निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि PDP ने चुनाव में अपना चीफ पोलिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया था। ऐसे एजेंट मतदान प्रक्रिया की निगरानी, बैलेट की जांच और किसी भी गड़बड़ी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अधिकृत होते हैं।
NC का आरोप है कि PDP की इस अनुपस्थिति के कारण चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों में निगरानी कमजोर रही, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोकने में कमी आई।
यह विवाद अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गया है, जहां दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। NC प्रवक्ता इमरान नबी डार ने X पर पोस्ट करते हुए PDP पर गंभीर सवाल उठाए और BJP उम्मीदवार सत शर्मा को मिले अतिरिक्त वोटों को लेकर विभिन्न संभावनाएं भी गिनाईं, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है और राज्यसभा चुनाव की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।