जापान सिंगापुर में हिमाचली सेब कंसंट्रेट को झटका HPMC के सामने नई चुनौती
हिमाचली सेब जूस को विदेश में झटका
शिमला: हिमाचल प्रदेश के सेब से तैयार होने वाले एप्पल जूस कंसंट्रेट (AJC) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) की ओर से जापान और सिंगापुर के बाजारों में करीब 250 टन एप्पल जूस कंसंट्रेट भेजा गया था, लेकिन वहां अपेक्षित मांग नहीं मिलने के बाद इन बाजारों में आगे निर्यात की संभावनाएं कमजोर पड़ गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचली सेब से तैयार कंसंट्रेट की मिठास जापान और सिंगापुर के उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप नहीं रही। इसके चलते उत्पाद को उम्मीद के मुताबिक बाजार नहीं मिल पाया। अब HPMC के सामने पहले से तैयार बड़ी मात्रा में कंसंट्रेट बेचने के लिए नए घरेलू और विदेशी खरीदार तलाशने की चुनौती है।
250 टन भेजने के बाद लगा ब्रेक
हिमाचली सेब के कंसंट्रेट को विदेशी बाजार में पहुंचाना HPMC के लिए महत्वपूर्ण पहल थी। जापान और सिंगापुर जैसे बाजारों में लगभग 250 टन उत्पाद भेजने के बाद उम्मीद थी कि आगे बड़े स्तर पर निर्यात का रास्ता खुलेगा। लेकिन उपभोक्ताओं की स्वाद संबंधी पसंद अलग होने के कारण यह प्रयोग अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाया। इस अनुभव से यह भी स्पष्ट हुआ है कि विदेशी बाजार में किसी खाद्य उत्पाद को उतारने से पहले वहां के उपभोक्ताओं की पसंद, मिठास का स्तर, गुणवत्ता मानक, पैकेजिंग और कीमत जैसे पहलुओं का गहराई से अध्ययन जरूरी है।
करीब 1400 टन कंसंट्रेट बेचने की चुनौती
HPMC के सामने अब पुराने स्टॉक की बिक्री भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अप्रैल 2026 के आधिकारिक बिक्री दस्तावेज के अनुसार 2024 और 2025 फसल वर्ष का कुल 1,616.636 टन एप्पल जूस कंसंट्रेट बिक्री के लिए उपलब्ध था। इसमें 2024 का 586.061 टन और 2025 का 1,030.575 टन स्टॉक शामिल था। हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में करीब 1,400 टन कंसंट्रेट बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसके लिए निगम घरेलू बाजार के साथ नए विदेशी खरीदारों की तलाश कर रहा है। HPMC ने अप्रैल में 2024 और 2025 के कंसंट्रेट की बिक्री के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) भी निकाला था। इस बिक्री प्रक्रिया का अनुमानित मूल्य करीब 41.60 करोड़ रुपये रखा गया था।
पुराने स्टॉक को बेचने की भी कोशिश
निगम ने जुलाई 2026 में 2023 फसल वर्ष के एप्पल जूस कंसंट्रेट की बिक्री के लिए भी अलग EOI जारी किया। इसमें फूड और बेवरेज निर्माता, प्रोसेसिंग यूनिट, ट्रेडर, एक्सपोर्ट हाउस और थोक खरीदारों को आकर्षित करने की कोशिश की गई।
इससे साफ है कि निगम के लिए उत्पादन के साथ तैयार कंसंट्रेट की समय पर बिक्री सुनिश्चित करना भी अहम मुद्दा बन गया है। अगर स्टॉक लगातार बढ़ता है तो नई फसल से तैयार होने वाले उत्पाद के भंडारण और मार्केटिंग पर भी दबाव बढ़ सकता है।
C-ग्रेड सेब के लिए प्रोसेसिंग महत्वपूर्ण
हिमाचल प्रदेश में हर साल बड़ी मात्रा में ऐसे सेब पैदा होते हैं जो आकार, रंग या बाहरी गुणवत्ता के कारण प्रीमियम ताजा फल बाजार के मानकों पर खरे नहीं उतरते। ऐसे C-ग्रेड सेब को प्रोसेसिंग उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है। इससे जूस कंसंट्रेट, सिरका और दूसरे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। मौजूदा सीजन में HPMC ने C-ग्रेड सेब की खरीद शुरू की है। बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने वाले सेब को प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाकर एप्पल जूस कंसंट्रेट और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पाद तैयार करने की योजना है।
यह व्यवस्था बागवानों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कमर्शियल ग्रेड में नहीं आने वाले फलों के लिए वैकल्पिक बाजार मिलता है। इसलिए तैयार उत्पाद की बिक्री प्रभावित होने का असर लंबे समय में पूरी प्रोसेसिंग चेन पर पड़ सकता है।
हिमाचल में बड़ी प्रोसेसिंग क्षमता
HPMC के पास पराला, परवाणू और जारोल में सेब प्रोसेसिंग की सुविधाएं हैं। पराला स्थित आधुनिक प्लांट में एक सीजन में करीब 18 हजार टन सेब क्रश करने और लगभग 1,800 टन एप्पल जूस कंसंट्रेट तैयार करने की क्षमता बताई गई है। ऐसे में उत्पादन क्षमता का पूरा लाभ तभी मिल सकता है जब तैयार कंसंट्रेट के लिए स्थायी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी उपलब्ध हों।
अब नए बाजारों पर नजर
जापान और सिंगापुर से मिले अनुभव के बाद HPMC के सामने अब ऐसे बाजार तलाशने की चुनौती है, जहां हिमाचली सेब के स्वाद और मिठास वाले कंसंट्रेट की बेहतर मांग हो। इसके लिए फूड प्रोसेसिंग कंपनियों, पेय पदार्थ निर्माताओं, थोक खरीदारों और एक्सपोर्ट हाउस के साथ नए कारोबारी संबंध बनाने पर जोर दिया जा सकता है। हिमाचल में सेब हजारों बागवान परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में प्रोसेसिंग से तैयार उत्पादों के लिए मजबूत बाजार विकसित होना केवल HPMC के कारोबार ही नहीं, बल्कि राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। जापान और सिंगापुर में 250 टन खेप के बाद लगा ब्रेक अब निगम को विदेशी बाजारों की मांग और स्वाद के अनुरूप रणनीति बनाने का संकेत दे रहा है।